व्यापार

यूएस-ईरान तनाव के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को शुरुआती कारोबार में बड़ा झटका

नई दिल्ली, 2 जून। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में शुरुआती मिनटों में ही करीब 3.75 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 450 अंकों से अधिक टूटकर 73,800 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 150 अंकों से ज्यादा फिसलकर 23,200 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में कमजोरी का असर व्यापक रहा और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।

इन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

बाजार में गिरावट के दौरान बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), ट्रेंट, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और एलएंडटी जैसे प्रमुख शेयरों में 1 से 3 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।

हालांकि आईटी सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और इनमें 1 से 3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, ईरान और इजराइल से जुड़ी घटनाओं ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है। निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़े तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। सोमवार को भी उन्होंने हजारों करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। चालू वर्ष में विदेशी निवेशकों द्वारा बड़ी मात्रा में पूंजी निकाले जाने से बाजार पर दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञों की राय

बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, ऊंची ऊर्जा कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली निकट भविष्य में भारतीय बाजार के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं। साथ ही आर्थिक वृद्धि और महंगाई से जुड़े अनुमान भी निवेशकों की नजर में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

फिलहाल निवेशकों की निगाहें मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल के रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।

Related Articles

Back to top button