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MSCI की टॉप-10 लिस्ट से बाहर हुईं भारतीय दिग्गज कंपनियां! AI क्रांति ने बदला खेल, जानिए क्यों फिसला भारत का दबदबा

नई दिल्ली : वैश्विक निवेश जगत में भारत के लिए एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दुनिया के सबसे प्रभावशाली एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स की शीर्ष-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में अब एक भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है। इतना ही नहीं, शीर्ष-100 कंपनियों में भी कोई भारतीय कंपनी जगह नहीं बना सकी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर आधारित कंपनियों की जबरदस्त बढ़त है।

क्या है MSCI इंडेक्स और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स को वैश्विक निवेशकों का प्रमुख मानक माना जाता है। दुनिया भर के बड़े विदेशी संस्थागत निवेशक और करीब 700 अरब डॉलर के पैसिव फंड इसी इंडेक्स के आधार पर निवेश रणनीति तय करते हैं।

किसी देश या कंपनी का इस इंडेक्स में वजन बढ़ने पर विदेशी निवेश स्वतः आकर्षित होता है, जबकि वजन घटने पर निवेश का प्रवाह कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में इंडेक्स में भारत की घटती हिस्सेदारी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

मार्च तक टॉप-10 में थीं दो भारतीय कंपनियां

कुछ महीने पहले तक स्थिति अलग थी। मार्च में एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स की शीर्ष-10 कंपनियों में शामिल थीं। एचडीएफसी बैंक सातवें और रिलायंस इंडस्ट्रीज आठवें स्थान पर थे।

लेकिन अब एचडीएफसी बैंक 11वें और रिलायंस इंडस्ट्रीज 12वें स्थान पर पहुंच गई हैं। इसके साथ ही इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज घटकर 10.87 प्रतिशत रह गया है, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।

100 अरब डॉलर क्लब में भी घटी भारतीय कंपनियों की संख्या

एक समय 100 अरब डॉलर से अधिक बाजार पूंजीकरण वाली भारतीय कंपनियों की संख्या छह थी। अब यह घटकर सिर्फ तीन रह गई है। इस सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल ही बची हैं।

इस बदलाव ने वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों ने बदला पूरा समीकरण

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई वैश्विक तेजी है। ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन की कंपनियों ने इस क्षेत्र में जबरदस्त बढ़त हासिल की है।

ताइवान की टीएसएमसी, दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां एआई युग की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी हैं। इन कंपनियों के बाजार मूल्य में भारी उछाल आने के बाद उन्होंने एमएससीआई रैंकिंग में तेजी से ऊपर जगह बना ली।

वैश्विक निवेशकों की पसंद बदली

दुनिया भर के निवेशक फिलहाल एआई और चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। टीएसएमसी, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स के शेयरों में पिछले समय में 48 प्रतिशत से लेकर 194 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।

दूसरी ओर भारतीय आईटी कंपनियां मुख्य रूप से पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं पर केंद्रित रहीं, जिसके चलते वे एआई निवेश उछाल का वैसा लाभ नहीं उठा सकीं जैसा पूर्वी एशिया की तकनीकी कंपनियों को मिला।

भारतीय आईटी सेक्टर से भी घटा विदेशी निवेश

आंकड़ों के अनुसार, 2025 की शुरुआत में भारतीय आईटी कंपनियों में विदेशी निवेशकों का निवेश लगभग 81 अरब डॉलर था, जो मई तक घटकर करीब 40 अरब डॉलर रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक पूंजी फिलहाल एआई और सेमीकंडक्टर आधारित कंपनियों की ओर अधिक आकर्षित हो रही है।

क्या भारत के लिए चिंता की बात है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत की आर्थिक कमजोरी नहीं दर्शाती, बल्कि वैश्विक निवेश थीम में आए बदलाव का परिणाम है। यदि भारतीय कंपनियां एआई, उन्नत तकनीक और चिप निर्माण जैसे क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती हैं, तो आने वाले समय में भारत फिर से वैश्विक निवेशकों की पसंद बन सकता है।

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