
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने पुराने और अनुपयोगी कपड़ों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए नई पहल ‘अर्पण’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना का शुभारंभ किया। इसके तहत अब दिल्लीवासी अपने पुराने कपड़ों को कचरे में फेंकने के बजाय शहर के 10 चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर बनाए गए विशेष संग्रह केंद्रों में दान कर सकेंगे।
योजना के शुभारंभ के अवसर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन, राज्य शहरी आजीविका मिशन, क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन और ‘रेस्पन’ संस्था के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
क्या है ‘अर्पण’ पहल का उद्देश्य
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अनुपयोगी कपड़ों को कूड़े के ढेर में जाने से रोकना, कपड़ा उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट को कम करना और पुनर्चक्रण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। इसके जरिए कपड़ों के दोबारा उपयोग और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दान किए गए कपड़ों का कैसे होगा उपयोग
योजना के तहत एकत्र किए गए उपयोग योग्य कपड़ों को स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से नए उत्पादों में बदला जाएगा। इन कपड़ों से बैग, थैले और अन्य उपयोगी एवं सजावटी वस्तुएं तैयार की जाएंगी, जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
वहीं, जो कपड़े पहनने योग्य नहीं होंगे, उन्हें रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के जरिए नए कच्चे माल और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा।
सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कर सकेंगे दान
दिल्लीवासी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच निर्धारित संग्रह केंद्रों पर अपने पुराने कपड़े जमा कर सकेंगे। शुरुआत में यह सुविधा राजधानी के 10 मेट्रो स्टेशनों पर उपलब्ध कराई गई है।
इन 10 मेट्रो स्टेशनों पर खुलेंगे ‘अर्पण’ संग्रह केंद्र
- शाहदरा
- डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल
- मालवीय नगर
- हौज खास
- द्वारका
- मोहन एस्टेट
- लाजपत नगर
- मयूर विहार फेज-1
- पंजाबी बाग वेस्ट
- शालीमार बाग
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार पर भी फोकस
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस पहल से एक ओर कपड़ा कचरे में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।



