
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बैटल कैजुअल्टी अधिकारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित किए जाने के मामले में हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार शब्दों की तकनीकी व्याख्या का सहारा लेकर शहीद परिवार को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य अपनी बनाई हुई नीति को कानूनी दांव-पेच के जरिए निष्प्रभावी नहीं बना सकता।
हाई कोर्ट ने सरकार के तीनों आदेश किए रद्द
जस्टिस निधि गुप्ता की एकल पीठ ने ब्रिगेडियर अभिमन्यु सिंह राठौड़ के पुत्र सक्षम राठौड़ की याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार द्वारा अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने वाले तीनों आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सक्षम राठौड़ को चार महीने के भीतर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी जाए।
लेह में ऑपरेशन के दौरान हुई थी ब्रिगेडियर की मृत्यु
मामले के अनुसार, ब्रिगेडियर अभिमन्यु सिंह राठौड़ का 30 जुलाई 2023 को लेह में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान निधन हो गया था। यह अभियान चीन की आक्रामक गतिविधियों के बीच संचालित किया जा रहा था। बाद में 10 जनवरी 2024 को भारतीय सेना ने इस घटना को बैटल कैजुअल्टी घोषित किया।
सरकार ने तीन बार खारिज किया था दावा
सक्षम राठौड़ ने 28 सितंबर 2018 की राज्य सरकार की नीति के तहत अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया था। हालांकि हरियाणा सरकार ने 16 फरवरी 2024, 24 मई 2024 और 4 दिसंबर 2025 को जारी आदेशों के माध्यम से उनका आवेदन खारिज कर दिया था।
सरकार ने क्या दिया था तर्क?
राज्य सरकार का कहना था कि संबंधित नीति का लाभ केवल शहीदों के आश्रितों को दिया जाता है, जबकि बैटल कैजुअल्टी के मामलों को इस नीति के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इसी आधार पर सक्षम राठौड़ की अनुकंपा नियुक्ति की मांग अस्वीकार की गई थी। हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए सरकार के सभी आदेश निरस्त कर दिए।



