राज्य

गणेश चतुर्थी पर आंध्र प्रदेश में बड़ा ऐलान, सभी गणेश पंडालों को मिलेगी मुफ्त बिजली; मंत्री नारा लोकेश ने की घोषणा

अमरावती: गणेश चतुर्थी के मौके पर आंध्र प्रदेश सरकार ने गणेश उत्सव समितियों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। मानव संसाधन मंत्री नारा लोकेश ने कहा है कि राज्य में गणेश चतुर्थी के दौरान सभी गणेश पंडालों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने इसे सरकार की बड़ी त्योहारी पहल बताया है, जिसका उद्देश्य उत्सव मना रहे समुदायों को सहयोग देना है।

नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि गणेश चतुर्थी पर पूरे आंध्र प्रदेश में गणेश पंडालों को मुफ्त बिजली दी जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से राज्यभर में त्योहार का उत्साह और बढ़ेगा। मंत्री ने भगवान गणेश से हर परिवार को समृद्धि, खुशी और सफलता का आशीर्वाद देने की कामना भी की।

पंडाल आयोजकों को मिलेगी बड़ी राहत

सरकार के इस फैसले से गणेश उत्सव के दौरान पंडाल लगाने वाले आयोजकों को बिजली के खर्च से राहत मिलेगी। राज्यभर में सामुदायिक स्तर पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और कई जगहों पर सड़कों पर भव्य पंडाल सजाए जाते हैं।

आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी को ‘विनायक चविथि’ के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार पारंपरिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक मानी जाती है और इसे ज्ञान, समृद्धि तथा नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।

घर-घर में भी निभाई जाती है खास परंपरा

गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालु अपने घरों में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं लाते हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्तर पर पंडालों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

आंध्र प्रदेश में घरों में मिट्टी से बनी प्रतिमा को ‘मट्टी विनायकडु’ और हल्दी से बनी प्रतिमा को ‘सिद्धि विनायकडु’ कहा जाता है। इन प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

10 दिन तक पूजा, फिर निकाली जाती है विसर्जन यात्रा

राज्य के शहरों और कस्बों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के बाद रोजाना वैदिक मंत्रों, आरती और भोग के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। भगवान गणेश को मोदक के अलावा कुदुमु और अन्नादम जैसे विशेष प्रसाद भी चढ़ाए जाते हैं।

गणेश उत्सव 10 दिनों तक चलता है। इसके बाद श्रद्धालु धूमधाम से शोभायात्रा निकालते हैं और गणेश प्रतिमा का जल में विसर्जन किया जाता है। इसे भगवान गणेश के कैलाश पर्वत लौटने का प्रतीक माना जाता है।

Related Articles

Back to top button