यमन का सऊदी अरब पर बड़ा पलटवार, अरामको से जुड़ी तेल सुविधा पर मिसाइल-ड्रोन हमला; कई इलाकों में गूंजे धमाके

नई दिल्ली: यमन की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किए जाने का दावा किया गया है। हमलों के दौरान सऊदी अरब के जिजान औद्योगिक क्षेत्र में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जिजान स्थित एक महत्वपूर्ण सऊदी प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया, जिससे दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको से जुड़ी सुविधाओं पर भी खतरा पैदा हो गया।
बिजली आपूर्ति प्रभावित, कई क्षेत्रों में जारी हुआ अलर्ट
हमले के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की सूचना है। अरब मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यमन की ओर से अरामको से संबंधित एक तेल सुविधा को भी निशाना बनाया गया। हमलों का असर जिजान के अलावा यानबू और दमाद क्षेत्रों तक बताया जा रहा है।
स्थिति को देखते हुए सऊदी सिविल डिफेंस ने यानबू प्रांत के लिए राष्ट्रीय अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपातकालीन अलर्ट जारी किया है।
सऊदी हमलों के बाद बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब और यमन के हूती समूह के संबंध भी लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। शुक्रवार देर रात सऊदी अरब ने यमन के हूती नियंत्रित होदेइदा शहर में हवाई हमले किए थे।
हूती ने पहले ही दी थी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
हूती समूह के विदेश मंत्रालय ने सऊदी कार्रवाई के बाद चेतावनी दी थी कि इस हमले की कीमत सऊदी अरब को चुकानी पड़ेगी और इसका जवाब दिया जाएगा।
हूती से जुड़े अल मसीरा टीवी के अनुसार, होदेइदा में दूरसंचार प्राधिकरण की सुविधाओं और कमरान द्वीप को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में एक महिला के घायल होने की भी जानकारी दी गई थी।
लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमले का भी दावा
इससे पहले बुधवार को हूती समूह ने दावा किया था कि उसने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया, जिसमें कम से कम एक जहाज को नुकसान पहुंचा। समूह ने इसे 20 जुलाई को घोषित नाकेबंदी के तहत की गई कार्रवाई बताया था और कहा था कि यह सना हवाई अड्डे पर हुए हमले का जवाब है।
2022 के बाद बनी शांति पर संकट
सना हवाई अड्डे पर हुए हमले की जिम्मेदारी सऊदी समर्थित सरकार ने ली थी। अब ताजा घटनाक्रम के बाद वर्ष 2022 से दोनों पक्षों के बीच बनी अनौपचारिक शांति कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। बढ़ते तनाव के कारण लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्ग और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।



