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ब्रह्म मुहूर्त में भूलकर भी न करें ये काम, सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच शास्त्रों में बताई गई खास मान्यताएं

नई दिल्ली: सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को दिन के सबसे पवित्र और शुभ समयों में माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान वातावरण शांत रहता है और मन को आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है। इसी वजह से ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-पाठ, ध्यान और मंत्र जाप करने की परंपरा रही है। मान्यता के अनुसार दिन की शुरुआत जिन विचारों और गतिविधियों से होती है, उनका असर व्यक्ति के पूरे दिन के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए इस समय कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

आमतौर पर ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह करीब 4 बजे से 5:30 बजे के बीच माना जाता है। हालांकि सूर्योदय के समय में बदलाव के कारण इसका वास्तविक समय स्थान और मौसम के अनुसार अलग हो सकता है। धार्मिक परंपराओं में इस अवधि को जागने, ध्यान लगाने और ईश्वर का स्मरण करने के लिए उपयुक्त माना गया है। इस दौरान मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

ब्रह्म मुहूर्त में तुरंत भोजन करने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में जागने के तुरंत बाद भोजन नहीं करना चाहिए। इस समय को आध्यात्मिक साधना, पूजा और ध्यान के लिए उपयुक्त माना गया है। परंपरा के अनुसार जागने के बाद पहले दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर ध्यान और ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थिति को प्राथमिकता देना जरूरी है।

किसी के साथ कटु व्यवहार न करने की मान्यता
ब्रह्म मुहूर्त के दौरान किसी का अपमान करने, क्रोध करने या कटु शब्द बोलने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सुबह का समय मन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर होता है। ऐसे में विवाद और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर शांत मन से दिन की शुरुआत करने पर जोर दिया गया है।

प्रणय संबंध से बचने की धार्मिक मान्यता
कुछ धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के ध्यान के लिए समर्पित समय माना गया है। इसी वजह से इस अवधि में प्रणय संबंध बनाने से बचने की बात कही गई है। परंपरा के अनुसार नींद से जागने के बाद व्यक्ति को सबसे पहले भगवान का स्मरण करना चाहिए और सकारात्मक विचारों के साथ दिन की शुरुआत करने पर ध्यान देना चाहिए।

हथेलियों के दर्शन के साथ मंत्र जाप की परंपरा
धार्मिक परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद हथेलियों के दर्शन करते हुए एक पारंपरिक मंत्र के जाप की मान्यता है। मंत्र है- ओम कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविंद, प्रभाते कर दर्शनम्। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जरिए दिन की शुरुआत मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान विष्णु के स्मरण से की जाती है। इसे शुभ और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना गया है।

हनुमान चालीसा का पाठ भी माना गया है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचक और भय का नाश करने वाला माना जाता है। धार्मिक परंपरा में हनुमान जी की आराधना से पहले भगवान राम का नाम लेने को भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि राम नाम के स्मरण के साथ हनुमान जी की पूजा करने से मन में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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