
नई दिल्ली। फिटनेस को अक्सर शरीर के आकार और वजन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन स्वस्थ शरीर की पहचान केवल पतला दिखना नहीं है। किसी व्यक्ति का वजन सामान्य होने के बावजूद उसकी शारीरिक क्षमता कमजोर हो सकती है, जबकि थोड़ा अधिक वजन वाला व्यक्ति रोजमर्रा के काम आसानी से कर सकता है और उसकी शारीरिक क्षमता अच्छी हो सकती है। इसलिए फिटनेस का सही आकलन शरीर की कार्यक्षमता से करना ज्यादा जरूरी है।
रोजमर्रा के काम करने की क्षमता भी बताती है फिटनेस
सीढ़ियां चढ़ना, पैदल चलना, सामान उठाना या सामान्य शारीरिक मेहनत के बाद शरीर कितनी जल्दी थकता है, इससे शारीरिक क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि पहले की तुलना में सामान्य गतिविधियों के दौरान जल्दी थकान महसूस होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
चलने या सामान्य गतिविधि के दौरान जरूरत से ज्यादा सांस फूलना भी शरीर की क्षमता से जुड़ा संकेत हो सकता है। हालांकि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। यदि सांस फूलने की समस्या लगातार बनी रहती है या सामान्य गतिविधियों के दौरान अचानक बढ़ जाती है तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
ताकत, लचीलापन और संतुलन भी जरूरी
अच्छी फिटनेस का मतलब केवल बेहतर कार्डियो क्षमता नहीं है। शरीर की ताकत, लचीलापन और संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। आसानी से झुक पाना, शरीर को नियंत्रित तरीके से घुमा पाना और सामान्य गतिविधियों के दौरान संतुलन बनाए रखना शारीरिक क्षमता के अहम संकेत हैं।
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत और शरीर का संतुलन बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
व्यायाम का उद्देश्य सिर्फ वजन कम करना नहीं
व्यायाम को केवल वजन घटाने या शरीर को आकर्षक बनाने तक सीमित नहीं करना चाहिए। मजबूत मांसपेशियां रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने के साथ शरीर की स्थिरता और गतिविधियों को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं।
नियमित शारीरिक गतिविधि लंबे समय तक शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में भी उपयोगी हो सकती है। इसलिए फिटनेस का लक्ष्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत और सक्रिय रखना होना चाहिए।
रेस्टिंग हार्ट रेट भी देता है संकेत
रेस्टिंग हार्ट रेट स्वास्थ्य का एक संकेत माना जाता है, लेकिन इसे अकेले फिटनेस का पैमाना नहीं बनाया जा सकता। उम्र, शारीरिक सक्रियता, दवाओं और दूसरी परिस्थितियों के कारण अलग-अलग लोगों की हृदय गति अलग हो सकती है।
यदि हृदय गति लगातार असामान्य बनी रहती है या उसके साथ अन्य परेशानी महसूस होती है तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी हो सकता है।
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर पर भी दें ध्यान
ब्लड प्रेशर शरीर की अंदरूनी सेहत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। केवल देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि किसी व्यक्ति का रक्तचाप सामान्य है या नहीं। इसलिए समय-समय पर इसकी जांच कराना उपयोगी है।
इसी तरह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल भी समग्र स्वास्थ्य को समझने में महत्वपूर्ण संकेतक हैं। इनकी स्थिति केवल शरीर के वजन से तय नहीं होती। सामान्य वजन वाले व्यक्ति में भी कुछ स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं, जबकि अधिक वजन वाले व्यक्ति में सभी स्वास्थ्य संकेतक जरूरी नहीं कि असामान्य हों।
नींद पूरी होना भी फिटनेस का हिस्सा
अच्छी फिटनेस के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद जरूरी है। नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक और शारीरिक कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करती है।
लगातार नींद पूरी नहीं होने पर थकान, एकाग्रता में कमी और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इसलिए फिटनेस रूटीन में व्यायाम के साथ पर्याप्त आराम और नींद को भी जगह देना जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना ठीक नहीं
फिटनेस का संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी है। लगातार तनाव, चिड़चिड़ापन, उदासी या रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि कम होना मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है।
नियमित शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकती है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए शरीर के साथ मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।
आईने में दिखने वाले शरीर से आगे समझें फिटनेस
असली फिटनेस केवल कम वजन या आकर्षक शरीर का नाम नहीं है। शरीर की ताकत, सहनशक्ति, संतुलन, लचीलापन, नींद, मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य संकेतक मिलकर किसी व्यक्ति की समग्र सेहत की तस्वीर सामने रखते हैं।
इसलिए अपने शरीर को केवल आईने में देखने के बजाय यह समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि वह रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है।



