उत्तर प्रदेशराज्य

राम मंदिर ट्रस्ट में फिर बदले फैसले, पुराने कर्मचारियों की हो रही वापसी; नोटिस वापस लेने के साथ पूर्व जिम्मेदारियां भी बहाल

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में किए गए बदलावों के बीच अब एक बार फिर फैसलों में बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर की व्यवस्थाओं को नए तरीके से लागू करने के साथ पुराने कर्मचारियों की भी ट्रस्ट में वापसी शुरू हो गई है। हाल के फैसलों से संकेत मिल रहे हैं कि मंदिर प्रबंधन में पहले हटाए गए कुछ कर्मचारियों को दोबारा उनकी पुरानी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

महासचिव गोविंद देव ने बदले पहले लिए गए फैसले

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने पूर्व में लिए गए कई फैसलों में बदलाव शुरू कर दिया है। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद जिन कर्मचारियों को हटाया गया था, उनकी अब दोबारा वापसी हो रही है। बताया जा रहा है कि इनमें विनोद राव और अनिल मिश्रा के करीबी माने जाने वाले लोग भी शामिल हैं। इन कर्मचारियों को उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर तैनात किया जा रहा है।

चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। कृष्ण मोहन ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए शिकायतों के आधार पर कुछ कर्मचारियों को हटाया, कई कर्मचारियों को नोटिस जारी किए और बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पटल भी बदले थे।

कृष्ण मोहन के फैसलों में लगातार हो रहा बदलाव

कृष्ण मोहन के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों के पटल बदले गए और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, इन नोटिसों पर अभी तक पूरी तरह अमल नहीं हुआ था। 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में सीईओ के ऐलान के बाद महासचिव की जिम्मेदारी गोविंद देव को सौंप दी गई। इसके बाद उन्होंने कृष्ण मोहन के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों को बदलना शुरू कर दिया।

इसी क्रम में गोपाल राव के बेहद करीबी माने जाने वाले सोमेश अलंदी को तीर्थ क्षेत्र पुरम से वापस राम मंदिर में तैनात करने का आदेश दिया गया।

दर्जनों कर्मचारियों के कारण बताओ नोटिस निष्प्रभावी

गोविंद देव के कार्यकाल में कृष्ण मोहन द्वारा दर्जनों कर्मचारियों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को वापस लेने के साथ उन्हें निष्प्रभावी करने का भी आदेश दिया गया है। दो दिन पहले शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता के साथ केडी तिवारी और बजरंग पाठक को भी उनकी पुरानी जिम्मेदारियों के साथ बहाल कर दिया गया।

संदीप गुप्ता को तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी। एक विदेशी महिला की शिकायत के बाद उन्हें इस व्यवस्था से हटा दिया गया था।

विदेशी महिला की शिकायत के बाद हटाए गए थे संदीप गुप्ता

लॉकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद विदेशी महिला ने ट्रस्ट को शिकायती पत्र भेजा था। इस शिकायत के आधार पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में उन्हें काम से पूरी तरह हटा दिया गया था।

अब आर्थिक रूप से कमजोर शहीद कारसेवक के परिवार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा राम मंदिर में काम दिया गया है। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद उनसे संदीप गुप्ता की बहाली की सिफारिश की गई थी। इसी सिफारिश के आधार पर उन्हें दोबारा बहाल कर यथास्थान नियुक्त कर दिया गया है।

केडी तिवारी को पुरानी जिम्मेदारी मिलने पर चर्चा तेज

कृष्ण मोहन के कार्यकाल में राम मंदिर में कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों को दिए गए कारण बताओ नोटिस को भी वापस लेने या निष्प्रभावी करने का आदेश जारी हो गया है। इसके साथ ही पटल परिवर्तन के जरिए कर्मचारियों के दायित्व बदलने से जुड़े आदेशों को भी पलटते हुए पूर्व जिम्मेदारियों को प्रभावी रखने का निर्देश दिया गया है।

इनमें पूर्व ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र के खास बताए जाने वाले केडी तिवारी को उनकी पुरानी जिम्मेदारी सौंपना खास चर्चा का विषय बन गया है। इससे पहले राम मंदिर में अलग-अलग एजेंसियों के लंबित सभी भुगतानों को जारी करने का आदेश भी दिया जा चुका है।

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