
एनसीआर की तर्ज पर यूपी में बनेगा एससीआर, पहला पड़ाव पार; बेस मैप को मिली मंजूरी, 6 जिलों में बदलेगी विकास की तस्वीर
लखनऊ: दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में लखनऊ और आसपास के जिलों को मिलाकर विकसित किए जा रहे स्टेट कैपिटल रीजन का पहला पड़ाव पार हो गया है। मंगलवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण में मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन के बेस मैप को मंजूरी दे दी गई। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए कार्यकारी समिति के सामने भेजा जाएगा। इसके बाद क्षेत्रीय महायोजना तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एससीआर में लखनऊ के साथ सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को शामिल किया गया है। इस पूरे क्षेत्र का कुल विस्तार 26,741 वर्ग किलोमीटर होगा। योजना का उद्देश्य इन छह जिलों को बेहतर संपर्क, आधारभूत सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों के जरिए एकीकृत विकास से जोड़ना है।
30 प्रमुख परियोजनाओं से बदलेगी कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, यूपीएससीआर के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित क्षेत्रीय महायोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत परिवहन और आवागमन, अर्थव्यवस्था, आधारभूत ढांचे और पर्यटन से जुड़ी 30 परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं।
छहों जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए राज्य राजधानी माला यानी क्षेत्रीय सड़क, एलिवेटेड पेरिफेरल रोड और सड़क उन्नयन के काम प्रस्तावित हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क विकसित करने की परियोजनाएं भी योजना में शामिल की गई हैं।
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर आधारित विकास जैसी परियोजनाओं को भी चिन्हित किया गया है।
निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर बनेंगे
बेस मैप को कार्यकारी समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्रीय महायोजना तैयार कराई जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, एससीआर के विकास से निवेश बढ़ने के साथ रोजगार और कारोबार के अवसर भी पैदा होंगे। योजना के तहत गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे लोगों को अपने ही क्षेत्र में रहने, कारोबार करने और रोजगार पाने के लिए बेहतर माहौल मिलने की उम्मीद है। छह जिलों के समन्वित विकास से राजधानी लखनऊ के आसपास के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।
22 विभागों की सहमति के बाद बेस मैप को मंजूरी
यूपीएससीआर के बेस मैप को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित विकास प्राधिकरणों के साथ राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, वन विभाग, नगर निगम और सिंचाई विभाग समेत 22 संस्थाओं से राय मांगी गई थी। सभी विभागों ने बेस मैप का परीक्षण करने के बाद अपनी सहमति दी।
मंगलवार को समीक्षा समिति की बैठक में बेस मैप का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसके बाद इसे मंजूरी दे दी गई। अब इसे कार्यकारी समिति के समक्ष भेजा जाएगा।
2,239 स्थानों पर हुआ स्थलीय सत्यापन
बेस मैप की प्रमाणिकता जांचने के लिए छहों जिलों में स्थलीय सत्यापन कराया गया। इस दौरान सलाहकार एजेंसी के साथ संबंधित विभागों ने भी उपग्रह तस्वीरों और नक्शों से मिले आंकड़ों का मौके पर जाकर मिलान किया।
पूरी प्रक्रिया के तहत कुल 2,239 स्थानों पर स्थलीय सत्यापन किया गया। बैठक में अपर जिलाधिकारी राकेश सिंह, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, अपर सचिव सीपी त्रिपाठी, मुख्य नगर नियोजक केके गौतम समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
चक गंजरिया सिटी में बनेगा आधुनिक आईटी पार्क
लखनऊ को सूचना प्रौद्योगिकी के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एलडीए ने चक गंजरिया सिटी में अत्याधुनिक आईटी पार्क की योजना पर भी काम तेज कर दिया है। इसके लिए अनुभवी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं और निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश निजी व्यावसायिक पार्क विकास योजना के तहत विकसित की जाएगी। आईटी पार्क के भूखंड की अधिक कीमत को देखते हुए इसे राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर विकसित करने की योजना बनाई गई है। भूखंड की आधार कीमत 421 करोड़ रुपये है और कंपनियों के इसे खरीदने में रुचि नहीं दिखाने के बाद एलडीए ने राजस्व हिस्सेदारी मॉडल अपनाने का फैसला किया है।
आधुनिक कार्यालय और डिजिटल सुविधाओं से लैस होगा आईटी पार्क
प्रस्तावित आईटी पार्क में आधुनिक कार्यालय परिसर, डिजिटल अवसंरचना, व्यावसायिक सुविधाएं और तकनीकी कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित किया जाएगा। इससे लखनऊ में निवेश आकर्षित करने के साथ प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चक गंजरिया सिटी पहले से योजनाबद्ध विकास क्षेत्र के तौर पर उभर रहा है और आईटी पार्क के बनने से इसकी उपयोगिता और बढ़ेगी।



