
नई दिल्ली: सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली सरकार के आदेश पर दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में चल रहे पेइंग गेस्ट आवासों का सर्वे शुरू कर दिया है। मंगलवार को सर्वे के पहले ही दिन 52 ऐसी इमारतों की पहचान की गई, जिनकी हालत जर्जर मिली और उनमें पीजी संचालित हो रहे थे। सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 5 छात्र शामिल थे।
एमसीडी ने दिल्ली में पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही 1,120 इमारतों की पहचान की है। इन भवनों में करीब 20,481 लोगों के रहने की जानकारी सामने आई है। अब इन सभी इमारतों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
इमारतों की पहचान कर तैयार किया जा रहा डेटाबेस
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर यह सर्वे शुरू किया गया है और इसे शुक्रवार तक पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल सर्वे के दौरान किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों का ध्यान पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतों की पहचान करने और उनका डेटाबेस तैयार करने पर है।
जिन भवनों की हालत खराब या जर्जर मिल रही है, उनके मालिकों को फिलहाल मरम्मत कराने की सलाह दी जा रही है। अधिकारी के अनुसार, पहले दिन सर्वे की गई इमारतों में 52 पीजी जर्जर हालत में मिले। हालांकि मंगलवार को जांची गई किसी भी इमारत को आधिकारिक तौर पर खतरनाक या जर्जर श्रेणी में नहीं रखा गया।
छात्रों को अचानक बेघर करने से बचने की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि आगे की कार्रवाई पर बाद में फैसला लिया जाएगा। इसकी वजह यह है कि यदि किसी इमारत को खाली कराया जाता है तो वहां रह रहे छात्रों को तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार के पास फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।
अचानक बड़ी संख्या में छात्रों को पीजी से हटाने की स्थिति में उनके सामने आवास का संकट खड़ा हो सकता है। साथ ही, किराये में बढ़ोतरी का असर भी छात्रों पर पड़ने की आशंका है। इसलिए फिलहाल सर्वे के जरिए स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
सिविल लाइंस में सबसे ज्यादा 450 पीजी
एमसीडी के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक सिविल लाइंस क्षेत्र में सबसे ज्यादा 450 पीजी की पहचान हुई है। इस क्षेत्र में मुखर्जी नगर जैसे इलाके शामिल हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के करीब हैं। इसके बाद केशवपुरम क्षेत्र में 245 पीजी मिले हैं।
अधिकारी के अनुसार, इन दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पीजी संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा लक्ष्मी नगर, विश्वास नगर, मुनिरका, राजेंद्र नगर और करोल बाग जैसे इलाकों में भी पीजी से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
अगले चरण में संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा की होगी जांच
मौजूदा सर्वे में मुख्य रूप से इमारतों की स्थिति पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इसके बाद अलग सर्वे के जरिए भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा संबंधी मंजूरी की जांच की जाएगी। यानी पीजी भवनों की सुरक्षा को लेकर कार्रवाई का अगला चरण मौजूदा सर्वे के बाद तय किया जाएगा।



