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अनंत चतुर्दशी पर आज देशभर में गणपति विसर्जन, जानिए बप्पा को विदाई देने का शुभ मुहूर्त और पूरी विधि

नई दिल्ली: देशभर में 10 दिवसीय गणेश उत्सव का आज समापन होने जा रहा है। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आज गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। इसी दिन भगवान विष्णु के ‘अनंत’ स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति विसर्जन के साथ बप्पा अपने धाम कैलाश की ओर लौटते हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद देते हैं।

पौराणिक मान्यता के मुताबिक, महाभारत का लेखन कार्य पूरा करने के बाद गणेश जी ने इसी पावन तिथि पर शीतल जल में स्नान किया था। अनंत चतुर्दशी को भगवान श्रीहरि विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का भी पर्व माना जाता है। ऐसे में इस दिन गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि का विशेष महत्व है।

गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त

गणेश विसर्जन के लिए दिनभर में कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। सुबह 6 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक चर, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा।

शाम 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक चर मुहूर्त और रात 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक लाभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 26 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट से सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक शुभ, अमृत और चर मुहूर्त रहेगा।

कब शुरू हुई गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू हो चुकी है। इसका समापन 25 सितंबर यानी आज रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा।

गणेश विसर्जन से पहले ऐसे करें अंतिम पूजा

विसर्जन से पहले गणेश जी की विधिवत अंतिम पूजा करें। उन्हें लाल चंदन, दूर्वा, मोदक, लड्डू, फूल और फल अर्पित करें। इसके बाद कपूर जलाकर आरती करें। पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल या चूक के लिए गणेश जी से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।

पूजा समाप्त होने के बाद यह मंत्र बोलने की परंपरा है—

“गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ हुताशन॥”

इसके बाद लकड़ी की चौकी को थोड़ा सा हिलाया जाता है। इसे गणेश स्थापना के समय की समाप्ति का संकेत माना जाता है। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान करें। साथ में पूजा सामग्री, थोड़े चावल और मोदक की छोटी पोटली रखें।

जयकारों के साथ बप्पा को दें विदाई

गणेश जी की प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ सिर या हाथों में उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” के जयकारे लगाए जाते हैं।

विसर्जन स्थल पर पहुंचने के बाद एक बार फिर गणेश जी की आरती करें। इसके बाद प्रतिमा को श्रद्धा और सम्मान के साथ धीरे-धीरे जल में प्रवाहित करें।

घर पर ऐसे करें इको-फ्रेंडली विसर्जन

अगर घर पर गणेश विसर्जन कर रहे हैं तो बड़े गमले, बाल्टी या टब में साफ पानी भर सकते हैं। मंत्रों और जयकारों के साथ गणेश जी की प्रतिमा को धीरे से पानी में विसर्जित करें। प्रतिमा के पूरी तरह मिट्टी में घुल जाने के बाद उस पानी और मिट्टी को घर के पौधों या बगीचे में डाला जा सकता है।

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