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पितृ पक्ष में खरीदारी से बचें! इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है अशुभ, बढ़ सकती हैं परेशानियां

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में आश्विन माह का कृष्ण पक्ष पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है। यह अवधि पूर्वजों को समर्पित मानी जाती है। इस दौरान पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की परंपरा है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के 16 दिन संयम, सादगी और पूर्वजों के स्मरण के लिए माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दौरान नई या भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी चीजों की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। कुछ वस्तुओं को इस अवधि में घर लाना विशेष रूप से अशुभ माना जाता है।

नए कपड़े और सोने-चांदी के गहने

पितृ पक्ष को उत्सव या जश्न का समय नहीं, बल्कि पितरों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और स्मरण की अवधि माना जाता है। इसलिए इस दौरान अपने इस्तेमाल के लिए नए कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण या फैशनेबल वस्तुएं खरीदने से बचने की मान्यता है। हालांकि, पितरों के तर्पण या ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करने के लिए वस्त्र खरीदना वर्जित नहीं माना जाता।

नया वाहन और प्रॉपर्टी खरीदने से बचें

नई कार, बाइक, घर, दुकान या जमीन खरीदना जीवन में नए और शुभ काम की शुरुआत से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में नए काम या अचल संपत्ति का सौदा करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस अवधि में संपत्ति या वाहन में निवेश करने से अपेक्षित शुभ फल प्राप्त नहीं होते।

नई झाड़ू घर न लाएं

वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है। पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने को शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि श्राद्ध के दिनों में झाड़ू खरीदने से घर की बरकत प्रभावित हो सकती है और अनचाहे खर्च बढ़ सकते हैं।

लोहा और लोहे की चीजों से दूरी

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पितृ कार्य के दौरान लोहे के बर्तनों या अन्य लोहे की वस्तुओं का इस्तेमाल और खरीदारी शुभ नहीं मानी जाती। इसी वजह से श्राद्ध पक्ष में लोहा या लोहे से बनी नई चीजें घर लाने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और नया फर्नीचर न खरीदें

टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट से जुड़ी नई चीजों को भौतिक सुख-सुविधाओं से जोड़ा जाता है। चूंकि पितृ पक्ष को सादगी और पूर्वजों के स्मरण का समय माना जाता है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि के दौरान विलासिता से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।

10 अक्टूबर को होगी सर्वपितृ अमावस्या

इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। मान्यता के अनुसार जिन पूर्वजों की मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात नहीं होती, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाता है। इसे पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए विशेष दिन माना जाता है।

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