
पटना: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के दौरान बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। गुरुवार को पटना में इंडिया गठबंधन के लोकभवन मार्च के दौरान दोनों दलों के बीच तालमेल की कमी दिखाई दी। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस के निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले ही मार्च निकालकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने पहुंच गया। वहीं, बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता बाद में प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। सबसे अहम बात यह रही कि राज्यपाल को सौंपे गए छह सूत्री ज्ञापन पर राजेश राम के हस्ताक्षर नहीं थे।
तय समय से पहले निकला मार्च, कांग्रेस को नहीं मिली जानकारी
इंडिया गठबंधन की बैठक में लोकभवन मार्च सुबह 11 बजे निकालने का फैसला किया गया था। तेजस्वी यादव ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इसी समय की जानकारी दी थी। कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव के मुताबिक, इसी कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम समेत पार्टी के नेता सुबह करीब 10:50 बजे शहीद स्मारक पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में मार्च पहले ही निकाला जा चुका है। इसके बाद राजेश राम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना मार्च शुरू किया और विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के लोकभवन पहुंचने की जानकारी मिलने पर वे भी वहां रवाना हो गए।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं होने से बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में छह सूत्री मांग पत्र पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के हस्ताक्षर नहीं होना भी चर्चा का विषय बन गया। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं, लेकिन इस प्रक्रिया में बिहार प्रदेश कांग्रेस अलग-थलग नजर आई। हालांकि, कांग्रेस के पूर्व विधायक शकील अहमद खान तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में शामिल हुए। वह सुबह से ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।
तेजस्वी लौट रहे थे, तब लोकभवन पहुंचे कांग्रेसी
जब राजेश राम और कांग्रेस के अन्य नेता लोकभवन पहुंचे, तब तेजस्वी यादव समेत विपक्षी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ज्ञापन सौंपकर लौट रहे थे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष शहीद स्मारक वापस गए और हथकड़ी लगाकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने राजेश राम समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं को हिरासत में लेकर सचिवालय थाने पहुंचाया, जबकि अन्य कार्यकर्ताओं को एयरपोर्ट थाने ले जाया गया। करीब दो घंटे बाद उनसे बांड भरवाकर छोड़ दिया गया।
मार्च के समय में बदलाव पर राजद-कांग्रेस के अलग-अलग दावे
मार्च के समय को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बयान अलग-अलग रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि उन्हें कार्यक्रम का समय बदले जाने की सूचना नहीं दी गई थी। वहीं, राजद के प्रधान महासचिव रणविजय साहू ने दावा किया कि कांग्रेस को बदले हुए समय की जानकारी दी गई थी। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे से ही राजद और अन्य घटक दलों के कार्यकर्ता शहीद स्मारक पहुंचने लगे थे। तेजस्वी यादव सुबह लगभग 10:15 बजे वहां पहुंचे और करीब 10:30 बजे उनके नेतृत्व में मार्च शुरू हो गया।
शकील अहमद खान को पहले ही मिल गई थी जानकारी
कांग्रेस के पूर्व विधायक शकील अहमद खान सुबह करीब 10 बजे ही शहीद स्मारक के पास पहुंच गए थे। वह तेजस्वी यादव के नेतृत्व में हुए संयुक्त प्रदर्शन में शामिल होने वाले कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में अकेले थे। उन्होंने बताया कि बुधवार देर रात ही मार्च का समय सुबह 11 बजे से बदलकर 10 बजे किए जाने की जानकारी उन्हें मिल गई थी। इसी वजह से वह समय से पहले पहुंच गए। हालांकि, उनके मुताबिक बदले हुए कार्यक्रम की सूचना सभी नेताओं तक समय पर नहीं पहुंच सकी। बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजद और कांग्रेस के बीच जारी खींचतान के बीच इस घटनाक्रम ने इंडिया गठबंधन के आपसी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



