‘जंगली सूअर का दांत बनाएगा अमीर’… महाकाल के नाम पर चल रहा था करोड़ों का खेल! वन विभाग की जांच में बड़ा खुलासा

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन का नाम और बाबा महाकाल की आस्था का सहारा लेकर सोशल मीडिया पर लोगों को कथित तौर पर ठगने का मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम पर खुद को उज्जैन का निवासी बताने वाली एक महिला शादी, वशीकरण, रोजगार, आर्थिक तंगी और अन्य समस्याओं का समाधान करने का दावा करते हुए वन्यजीवों के अवशेष बेच रही थी। शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि महिला उज्जैन नहीं, बल्कि दिल्ली की रहने वाली है और अपने कथित कारोबार को बढ़ावा देने के लिए महाकाल और उज्जैन के नाम का इस्तेमाल कर रही थी।
वन्यजीवों के अवशेषों को बताती थी चमत्कारी
जांच के अनुसार महिला सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क करती थी और दावा करती थी कि तंत्र-मंत्र से सिद्ध किए गए जंगली जानवरों के दांत, बाल, हड्डियां, सींग, नाखून और पंजों के इस्तेमाल से शादी, रोजगार, वशीकरण, आर्थिक तंगी समेत कई तरह की परेशानियां दूर हो सकती हैं। वह कथित तौर पर यह भी दावा करती थी कि जंगली सूअर का दांत व्यक्ति को धनवान बना सकता है और जीवन की बाधाएं समाप्त कर सकता है।
शिकायत के बाद हरकत में आया वन विभाग
मामला वन्यजीवों के अवशेषों की कथित बिक्री से जुड़ा होने के कारण इसकी शिकायत वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को भेजी गई। इसके बाद उज्जैन वन विभाग ने जांच शुरू की और पूरे मामले की पड़ताल की।
ग्राहक बनकर किया संपर्क, खुली महिला की असल पहचान
उज्जैन के डीएफओ अनुराग तिवारी ने बताया कि वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर महिला से संपर्क किया। बातचीत के दौरान सामने आया कि वह उज्जैन में नहीं रहती, बल्कि दिल्ली से अपना पूरा नेटवर्क संचालित कर रही है। जांच में यह भी पता चला कि लोगों का भरोसा जीतने और अपने कथित कारोबार को बढ़ाने के लिए वह उज्जैन और बाबा महाकाल के नाम का इस्तेमाल कर रही थी।
बैंक खातों की जांच में भी मिला बड़ा सुराग
वन विभाग ने जिन बैंक खातों में लोगों से भुगतान कराया जा रहा था, उनकी जांच की तो सभी की केवाईसी दिल्ली की मिली। इसके बाद जांच से जुड़े सभी दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को भेज दिए गए हैं। अब आगे की कार्रवाई के लिए मामला दिल्ली की संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा।
महाकाल की तस्वीरों से जीतती थी लोगों का भरोसा
जांच में यह भी सामने आया कि महिला अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नियमित रूप से बाबा महाकाल की भस्म आरती, उज्जैन के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के वीडियो और तस्वीरें साझा करती थी। बीच-बीच में वह अपनी तस्वीरें भी पोस्ट करती थी, ताकि लोगों को यह विश्वास हो सके कि वह वास्तव में उज्जैन में रहती है। इसके अलावा कथित ग्राहकों के संदेश और स्क्रीनशॉट भी साझा किए जाते थे, जिनमें इन वस्तुओं से लाभ मिलने का दावा किया जाता था।
6 महीने में खातों में हुआ करीब 4 करोड़ रुपये का लेनदेन
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों के दौरान महिला के बैंक खातों में करीब चार करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है। यह राशि छोटे-छोटे भुगतान के रूप में जमा हुई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रकम वन्यजीवों के अवशेषों की कथित बिक्री या किसी अन्य अवैध गतिविधि से जुड़ी है या नहीं। विस्तृत जांच के बाद पूरे नेटवर्क और कथित कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।



