अमित शाह ने बदला भारतीय राजनीति का भूगोल, संगठन से लेकर राष्ट्रवाद तक नई दिशा दी: आर पी सिंह

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद यदि किसी नेता ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं। भाजपा नेता आर पी सिंह ने अमित शाह को आधुनिक भारत की राजनीति का “चाणक्य” बताते हुए कहा कि उनकी राजनीति केवल भाषणों और चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत संगठन, सूक्ष्म रणनीति, कार्यकर्ता आधारित विस्तार और राष्ट्रवादी विचारधारा को सशक्त बनाने पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा का उभार अमित शाह की रणनीतिक क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब राज्य में भाजपा की मौजूदगी बेहद सीमित मानी जाती थी और वामपंथ तथा तुष्टिकरण की राजनीति के बीच पार्टी के मजबूत विकल्प बनने की कल्पना भी कठिन थी। लेकिन आज बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है।
बंगाल में वैचारिक संघर्ष और संगठनात्मक मेहनत का परिणाम
आर पी सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे वर्षों की संगठनात्मक मेहनत, वैचारिक संघर्ष और अमित शाह की दूरदृष्टि रही। उन्होंने बंगाल को केवल एक चुनावी राज्य के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि माना, जिन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की और देश की एकता व अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि विभाजन के समय कोलकाता को भारत में बनाए रखने में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। आज बंगाल में राष्ट्रवादी विचारधारा का पुनर्जागरण उसी वैचारिक विरासत की वापसी के रूप में देखा जा सकता है।
नेतृत्व पहचानने की क्षमता बनी अमित शाह की सबसे बड़ी ताकत
आर पी सिंह ने कहा कि अमित शाह की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता उनकी नेतृत्व क्षमता पहचानने की योग्यता है। उन्होंने असम में हेमंत बिस्वा सरमा के जरिए भाजपा को मजबूत किया, वहीं पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को आगे लाकर संगठन को नई मजबूती दी। उनके अनुसार अमित शाह ने हर राजनीतिक चुनौती को अवसर में बदलने का काम किया।
उन्होंने कहा कि अमित शाह का योगदान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाई।
अनुच्छेद 370 हटाने को बताया ऐतिहासिक फैसला
आर पी सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला अमित शाह की राजनीतिक इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दशकों तक अलगाववाद, आतंकवाद और अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था को समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को पूरा किया गया।
उन्होंने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर में विकास, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकीकरण का नया अध्याय लिखा जा रहा है, जो केंद्र सरकार की मजबूत नीति और स्पष्ट दृष्टिकोण का परिणाम है।
नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रणनीति का दिखा असर
आर पी सिंह ने नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि अमित शाह ने इस चुनौती से निपटने के लिए कठोर और निर्णायक कदम उठाए। सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने, गांव-गांव तक विकास पहुंचाने और हिंसक नेटवर्क को कमजोर करने के कारण नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी लाल आतंक का प्रभाव था, वहां अब सड़क, शिक्षा, विकास और लोकतंत्र की आवाज सुनाई दे रही है।
भाजपा के विस्तार को बताया मजबूत नेतृत्व का परिणाम
भाजपा नेता ने कहा कि विपक्ष अक्सर पार्टी पर राजनीतिक विस्तारवाद के आरोप लगाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की कार्यशैली से प्रभावित होकर भाजपा से जुड़े। उन्हें पार्टी में स्पष्ट दृष्टि, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली राजनीति दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि अमित शाह ने वैचारिक प्रतिबद्धता और व्यावहारिक राजनीति के बीच संतुलन स्थापित किया है। उनकी राजनीति तात्कालिक प्रतिक्रिया पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति, मजबूत संगठन और निरंतर जनसंपर्क पर आधारित है।
पूर्वोत्तर से पूर्वी भारत तक भाजपा विस्तार का श्रेय
आर पी सिंह ने कहा कि अमित शाह केवल चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि राजनीतिक भूगोल बदलने की क्षमता रखते हैं। पूर्वोत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक भाजपा का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि मजबूत संगठन, स्पष्ट विचारधारा और प्रभावी नेतृत्व के जरिए असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज अमित शाह केवल भाजपा के रणनीतिकार नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां देश के जननेता हैं, वहीं अमित शाह उस संगठनात्मक ढांचे के निर्माता हैं जिसने भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।



