पंजाब चुनाव से पहले BJP ने बदला अपना सेनापति, पहली बार किसी सिख चेहरे को सौंपी कमान

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए वरिष्ठ नेता केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। भाजपा ने पहली बार किसी सिख नेता को पंजाब इकाई की कमान देकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब राज्य में सिख समुदाय और ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
बरनाला जिले के टल्लेवाल गांव से संबंध रखने वाले केवल सिंह ढिल्लों लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। मालवा क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले ढिल्लों को संगठन और जमीन से जुड़े नेता के तौर पर पहचाना जाता है।
कैप्टन अमरिंदर के करीबी रहे हैं केवल ढिल्लों
केवल सिंह ढिल्लों को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता रहा है। बताया जाता है कि वर्ष 2007 में उनके आग्रह पर ही बरनाला को जिला बनाए जाने का फैसला लिया गया था। उसी दौर में वे कांग्रेस टिकट पर बरनाला से विधायक चुने गए थे।
इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने बड़ी जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की। वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं और मालवा क्षेत्र में कांग्रेस के मजबूत नेताओं में गिने जाते थे।
हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव और 2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनकी राजनीतिक दिशा बदली और जून 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार बढ़ा कद
भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें संगरूर लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद से वे पंजाब भाजपा की कोर कमेटी में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने केवल सिंह ढिल्लों को आगे कर मालवा क्षेत्र, किसान वर्ग और सिख वोट बैंक को साधने की कोशिश शुरू कर दी है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह फैसला भाजपा की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जमीनी नेता की छवि ने दिलाई अलग पहचान
केवल सिंह ढिल्लों की पहचान सिर्फ एक राजनेता तक सीमित नहीं रही। वे अपने सरल व्यवहार और आम लोगों से सीधे जुड़ाव के लिए भी जाने जाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक वे बिना किसी दिखावे के गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और लंबे समय तक सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
उनके करीबी बताते हैं कि राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने हमेशा ग्रामीण संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा। यही वजह है कि मालवा क्षेत्र में उन्हें एक जमीनी और सहज नेता के रूप में देखा जाता है।
पंजाब भाजपा में नए समीकरणों की शुरुआत
भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि केवल सिंह ढिल्लों के अनुभव, संगठन क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव का फायदा पार्टी को आगामी चुनावों में मिल सकता है। पार्टी अब पंजाब में नए नेतृत्व और सामाजिक संतुलन के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है।
पंजाब की राजनीति में इस बदलाव के बाद अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या केवल सिंह ढिल्लों भाजपा को राज्य में नई राजनीतिक मजबूती दिला पाएंगे।



