
यूपी पुलिस भर्ती में बड़ी सेंध, बिना परीक्षा दिए ही बन गया सिपाही; एक चिट्ठी ने खोला पूरा फर्जीवाड़ा
मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस की सिपाही भर्ती प्रक्रिया में कड़ी सुरक्षा और पहचान सत्यापन के बावजूद बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आगरा के मुकुल पर आरोप है कि उसने खुद लिखित परीक्षा देने के बजाय अपनी जगह दोस्त रामरूप को परीक्षा में बैठा दिया। आरोप है कि रामरूप ने मुकुल के नाम पर लिखित परीक्षा से लेकर दस्तावेज सत्यापन और भर्ती की अन्य प्रक्रियाएं पूरी कीं। भर्ती में सफल होने के बाद मुकुल ने विभाग में नियुक्ति हासिल कर ली और मेरठ पुलिस लाइन में रिक्रूट आरक्षी के तौर पर प्रशिक्षण भी लेने लगा।
मामले का खुलासा एक शिकायत के बाद हुआ। शिकायत पर हुई विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि हुई। भर्ती रिकॉर्ड में दर्ज फोटो, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक जांच में गड़बड़ी मिली। इसके अलावा मुकुल और रामरूप के शारीरिक एवं चिकित्सकीय परीक्षण से जुड़े विवरणों में भी अंतर पाया गया।
जांच पूरी होने के बाद दोनों के खिलाफ थाना सिविल लाइन आरटीसी प्रभारी इंस्पेक्टर विजय बहादुर सिंह की ओर से नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं।
फोटो बदलकर परीक्षा से लेकर सत्यापन तक पूरी की प्रक्रिया
पुलिस लाइन में प्रशिक्षण ले रहे रिक्रूट मुकुल पुत्र पप्पूराम निवासी महाराजपुर, थाना निबोहरा, आगरा के खिलाफ कुछ महीने पहले पुलिस अधीक्षक और सीओ पुलिस लाइन को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत मिली थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुकुल ने अपनी जगह रामरूप पुत्र किशनचंद निषाद निवासी शाहबेद नरी का पुरा, निबोहरा, आगरा को पुलिस भर्ती परीक्षा में बैठाया। शिकायत के साथ मुकुल की वास्तविक फोटो भी दी गई थी।
आरोप था कि प्रवेश पत्र समेत भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों पर मुकुल की जगह रामरूप के फोटो का इस्तेमाल किया गया। इस तरह दूसरे व्यक्ति ने मुकुल की पहचान पर भर्ती की पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
जांच की भनक लगते ही ट्रेनिंग छोड़कर फरार हुआ मुकुल
मामले की जांच आगे बढ़ने के दौरान मुकुल मेरठ पुलिस लाइन से फरार हो गया। जांच रिपोर्ट एसपी यातायात ने एसएसपी को सौंप दी। इसके बाद एसएसपी के आदेश पर आरटीसी प्रभारी की ओर से मुकुल और रामरूप के खिलाफ थाना सिविल लाइंस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस अब दोनों आरोपियों की तलाश में जुटी है। उनकी गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमें लगाई गई हैं।
फर्जीवाड़े ने भर्ती प्रक्रिया की सुरक्षा पर खड़े किए सवाल
इस मामले ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती समेत अन्य सरकारी भर्तियों की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहचान सत्यापन, फोटो, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक जांच जैसी प्रक्रियाओं के बावजूद आरोपी भर्ती होकर प्रशिक्षण तक कैसे पहुंच गया।
अगर शिकायतकर्ता की ओर से पत्र नहीं भेजा जाता तो इस फर्जीवाड़े का समय रहते खुलासा होना मुश्किल था। यह मामला भर्ती प्रक्रिया में पहचान सत्यापन की व्यवस्था और उसकी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।



