धार की भोजशाला पर बड़ा फैसला, सरकारी रिकॉर्ड से हटाया गया ‘मस्जिद’ शब्द, अब 365 दिन पूजा कर सकेंगे हिंदू

धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दो दशक से ज्यादा समय से चला आ रहा कानूनी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नया शासकीय आदेश जारी करते हुए परिसर के आधिकारिक नाम से ‘मस्जिद’ शब्द हटा दिया है। अब यह स्थल केवल ‘भोजशाला’ के नाम से जाना जाएगा। साथ ही हिंदू श्रद्धालुओं को यहां पूरे साल बिना किसी रोक-टोक के पूजा-अर्चना और अध्ययन की अनुमति मिल गई है।
अब तक सरकारी और न्यायिक दस्तावेजों में इस परिसर का उल्लेख ‘भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद’ के रूप में किया जाता था। एएसआई के नए आदेश के बाद इस नाम में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसे हिंदू पक्ष की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
21 साल पुरानी व्यवस्था पूरी तरह खत्म
एएसआई ने 7 अप्रैल 2003 को जारी उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार के दिन पूजा की अनुमति दी गई थी। अब श्रद्धालु साल के 365 दिन प्राचीन परंपराओं के अनुसार मां वाग्देवी की पूजा और शास्त्र अध्ययन कर सकेंगे।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को नमाज की अनुमति से जुड़ी पूर्व व्यवस्था भी स्वतः समाप्त मानी जा रही है। अदालत ने वर्ष 2003 में लागू व्यवस्था को पूरी तरह पलट दिया है।
सुरक्षा और संरक्षण के लिए लागू रहेंगे नियम
हालांकि हिंदू समुदाय को निर्बाध प्रवेश और पूजा का अधिकार मिल गया है, लेकिन परिसर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता को देखते हुए कुछ नियम यथावत रखे गए हैं।
एएसआई ने स्पष्ट किया है कि भोजशाला परिसर प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के तहत राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक बना रहेगा। परिसर में प्रवेश का समय स्थानीय अधीक्षण पुरातत्वविद् जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय कर तय करेंगे।
इसके अलावा पूजा, अध्ययन और शोध से जुड़ी गतिविधियों को लेकर अलग से दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे ताकि स्मारक की मूल संरचना और ऐतिहासिक धरोहर को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
98 दिन के वैज्ञानिक सर्वे का भी हुआ उल्लेख
एएसआई ने अपने आदेश में कहा है कि हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक साहित्य और हाल ही में हुए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर यह माना कि भोजशाला मूल रूप से परमार वंश के राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत शिक्षा, साहित्य और व्याकरण का प्रमुख केंद्र था।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि परिसर की वास्तुकला, स्तंभ और अन्य संरचनाएं देवी सरस्वती को समर्पित भव्य मंदिर होने की पुष्टि करती हैं।
फैसले के बाद धार में बढ़ाई गई सुरक्षा
फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। वहीं हिंदू पक्षकारों और श्रद्धालुओं में फैसले को लेकर उत्साह का माहौल है।
कानूनी विशेषज्ञ इस आदेश को सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों की न्यायिक प्रक्रिया पर प्रभाव डाल सकता है।



