
नई दिल्ली : देश के लगभग हर हिस्से में चावल (Rice:) को बड़े चाव से खाया जाता है। वहीं, आजकल ज्यादातर लोग स्वास्थ्य के लिहाज से ब्राउन राइस का सेवन करने लगे हैं। ब्राउन राइस( Brown Rice) साबुत चावल होता है जिसे सामान्य सफेद चावल के मुकाबले कम प्रोसेस किया जाता है। आमतौर पर सफेद चावल को प्रोसेस कर उनका छिलका और बाहरी परत निकाल दी जाती है और इसके बाद इसे पॉलिश भी किया जाता है।
ब्राउन राइस को पॉलिश नहीं किया जाता है और यही कारण है कि इसे सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। ब्राउन राइस अनसैचुरेटेड फैटी एसिड, प्रोटीन, मिनरल्स, विटामिन्स और स्टार्च के गुणों से भरपूर होता है। इसका उपयोग बॉडी-बिल्डिंग से लेकर डायबिटीज और ह्रदय से जुड़ी बीमारियों के बचाव के लिए भी किया जाता है।
ब्राउन राइस को दिल (heart) के स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता है। दिल का दौरा या दिल की बीमारियां रक्त धमनियों में जमा हो रहे प्लाक के कारण होती है। ब्राउन राइस दिल से संबंधित विकारों से बचाव करता है।
ब्राउन राइस खाने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। यह घुलनशील फाइबर का स्त्रोत है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी बढ़ाता है।
ब्राउन राइस खाने से ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता है और डायबिटीज होने का खतरा भी काफी कम हो जाता है। ब्राउन राइस का ग्लासेमिक इंडेक्स बहुत ही कम होता है और धीरे पचता है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर कम रहने में मदद मिलती है।
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए ब्राउन राइस एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें उच्च मात्रा में फाइबर होता है, जिससे पेट भरा रहता है और बार-बार खाने से बच जाते हैं जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए भी ब्राउन राइस फायदेमंद हैं। यह स्तनपान के दौरान होने वाले तनाव, थकान और अवसाद से आराम दिला सकते हैं।
ब्राउन राइस पाचन के लिए भी अच्छा है। इसमें अघुलनशील फाइबर होते हैं जो पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं। इसके सेवन से कब्ज और बवासीर जैसे रोग से बचाव होता है।
हड्डियों को मजबूत बनाने में ब्राउन राइस अहम भूमिका निभाते हैं। दरअसल, मैग्नीशियम की कमी के कारण हड्डियों के घनत्व में कमी आ सकती है और ऑस्टियोपोरोसिस व गठिया जैसे रोग हो सकते हैं। इनमें उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है।
ब्राउन राइस में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो सांस संबंधी समस्याओं में लाभकारी हो सकते हैं।



