
चेन्नई: तमिलनाडु की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने एक और बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूर्ववर्ती सरकार के दौरान मंजूर किए गए 46 परियोजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति रद्द कर दी है। हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के तहत स्वीकृत इन परियोजनाओं की कुल लागत 245.85 करोड़ रुपये बताई गई थी। सरकार का कहना है कि मंदिरों से जुड़े संसाधनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय धार्मिक और श्रद्धालु हित से जुड़े कार्यों में किया जाएगा।
सत्ता में आते ही दिखाए सख्त तेवर
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक जीत के बाद 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले विजय ने शुरुआती दिनों से ही कई अहम फैसले लेकर प्रशासनिक सक्रियता का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव से पहले उन्हें लेकर जो अनुभवहीनता के सवाल उठाए जा रहे थे, उनके जवाब अब उनके फैसलों में दिखाई दे रहे हैं।
245 करोड़ के 46 प्रोजेक्ट्स पर लगी रोक
सरकार द्वारा रद्द किए गए 46 प्रोजेक्ट्स में विवाह मंडप और व्यावसायिक परिसरों जैसी योजनाएं शामिल थीं, जिन्हें पिछली सरकार के कार्यकाल में मंजूरी मिली थी। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिरों की आय और संपत्तियों का उपयोग सीधे धार्मिक गतिविधियों, मंदिर विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किया जाए।
सरकार ने संकेत दिया है कि इन परियोजनाओं के लिए निर्धारित राशि को अब मंदिरों और श्रद्धालुओं से जुड़ी नई योजनाओं में खर्च किया जाएगा।
अपराध और नशे के खिलाफ कड़ा रुख
मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रभावशाली लोगों के मामलों में भी निष्पक्ष और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
नशीले पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में एंटी-ड्रग टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय करेगा। वहीं महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर नियंत्रण के लिए विशेष टास्क फोर्स भी बनाई गई है।
मुफ्त बिजली से करोड़ों परिवारों को राहत
मुख्यमंत्री पद संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर विजय ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी। इस फैसले से राज्य के लगभग 2.4 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलने की बात कही गई है।
इसके अलावा धार्मिक स्थलों, स्कूल-कॉलेजों और बस स्टैंडों के आसपास संचालित 717 शराब दुकानों को बंद करने का भी आदेश जारी किया गया, जिसे सरकार की सामाजिक सुधार नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन और प्रशासनिक सुधार पर फोकस
राज्य सरकार ने भविष्य में सभी सार्वजनिक परिवहन बसों को वातानुकूलित बनाने की दिशा में काम शुरू करने का संकेत दिया है। साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में समयबद्धता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अर्थव्यवस्था और निवेश पर विशेष ध्यान
सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में निवेश, तकनीक, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए धान उत्पादन प्रोत्साहन योजना के तहत 134.83 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है। वहीं सहकारी बैंकों के ऋण राहत कार्यक्रम का पहला चरण भी शुरू किया गया है।
राजकोषीय पारदर्शिता पर जोर
राज्य सरकार ने वित्तीय स्थिति को लेकर श्वेत पत्र जारी करने का फैसला किया है, जिसमें राज्य पर मौजूद कर्ज और वित्तीय चुनौतियों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।



