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रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारियों की अब उसी जिले में नहीं होगी तैनाती, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

चंडीगढ़: भ्रष्टाचार के मामलों में विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो के ट्रैप में रंगे हाथों पकड़े जाने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर हरियाणा सरकार ने नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। अब रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारी और कर्मचारी जमानत पर रिहा होने के बाद भी उसी पद या स्टेशन पर तैनात नहीं रह सकेंगे। उन्हें ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाएगा, जो उनके खिलाफ दर्ज मामले की जांच और मुकदमे की सुनवाई से जुड़े क्षेत्राधिकार से दूर हो।

सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है, ताकि आरोपी कर्मचारी अपने पद, प्रशासनिक प्रभाव या स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न कर सकें। इस संबंध में मुख्य सचिव कार्यालय के विजिलेंस विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।

जमानत मिलने के बाद पुराने स्टेशन पर नहीं मिलेगी तैनाती

सरकार के संज्ञान में आया था कि ट्रैप केस में गिरफ्तार कुछ अधिकारी और कर्मचारी जमानत मिलने के बाद भी उसी स्टेशन पर काम करते रहते हैं, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होता है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता और गवाहों पर दबाव बनाने या उन्हें प्रभावित करने की आशंका बनी रहती है।

विजिलेंस विभाग का मानना है कि सरकारी पद और स्थानीय पहुंच का इस्तेमाल कर आरोपी कर्मचारी मुकदमे की निष्पक्ष प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमानत मिलने का मतलब पुराने पद या स्टेशन पर दोबारा तैनाती नहीं होगा। संबंधित विभागों को आरोपी कर्मचारी को ऐसी जगह भेजना होगा, जहां से वह शिकायतकर्ता और गवाहों से आसानी से संपर्क न कर सके।

जिला कैडर के कर्मचारियों के लिए भी तय हुई व्यवस्था

सरकार ने जिला कैडर के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी अलग प्रावधान किया है। चूंकि ऐसे कर्मचारियों का कार्यक्षेत्र सामान्य तौर पर संबंधित जिले तक सीमित होता है, इसलिए उनका दूसरे जिले में तबादला करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो सकता।

ऐसे मामलों में आरोपी कर्मचारी को उसी जिले के भीतर किसी अन्य दूरस्थ स्टेशन पर तैनात किया जाएगा। यानी जिला कैडर के कर्मचारी भी उस पुराने स्टेशन पर काम जारी नहीं रख सकेंगे, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है और मुकदमे की सुनवाई चल रही है।

सभी विभागों और जिला प्रशासन को भेजे गए निर्देश

विजिलेंस विभाग की ओर से जारी पत्र क्रमांक 09/49/2025-6VI प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्तों और जिला उपायुक्तों को भेजा गया है। इसके अलावा बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंध निदेशकों तथा मुख्य प्रशासकों को भी आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी आदेश की प्रतियां भेजी गई हैं। विजिलेंस विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विभागों और संस्थानों में इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करें। आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

9 जून के पत्र का भी दिया गया हवाला

सरकार के नए निर्देशों में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा के पुलिस महानिदेशक के 9 जून 2026 के डीओ पत्र संख्या 11297/Secret/SV & ACB(H) का भी संदर्भ दिया गया है। इसके आधार पर ट्रैप केस में आरोपित कर्मचारियों की जमानत के बाद तैनाती को लेकर विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतकर्ता और गवाहों को किसी भी तरह के दबाव या प्रभाव से बचाना और मुकदमे की निष्पक्षता बनाए रखना है। हालांकि, ट्रैप केस में आरोपित होना दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित मामले में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

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