देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में लगने वाली आग अब विकराल रूप लेती जा रही है। पहाड़ी इलाकों से शुरू हुई वनाग्नि अब मैदानी जिलों तक फैल चुकी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान लागू किया जाएगा।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस सीजन में अब तक राज्यभर में 460 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं में करीब 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सिर्फ गुरुवार को ही प्रदेश में 37 नई घटनाएं सामने आईं। देहरादून जिला फिलहाल सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जहां चार वन प्रभागों में करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। वहीं चमोली जिले में भी 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है।
तेज गर्मी और सूखी वनस्पतियां बनी बड़ी वजह
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पतियों और तेज हवाओं की वजह से आग तेजी से फैल रही है। कई इलाकों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहा है। स्थिति को देखते हुए पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं।
सबसे ज्यादा नुकसान देहरादून के कालसी वन प्रभाग में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गए। इसके अलावा चकराता, मसूरी और दून डिवीजन के जंगल भी आग की चपेट में हैं। दूसरी ओर चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र में भी वनाग्नि ने भारी तबाही मचाई है। यहां आग की घटनाओं में दो लोगों की मौत की पुष्टि भी हुई है।
सहयोग नहीं करने वालों पर दर्ज होंगे मुकदमे
वन विभाग अब आग की घटनाओं को लेकर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे। इसमें वन उपज लेने वाले, लकड़ी कटान की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण भी शामिल हो सकते हैं।
संशोधित नियमों के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल और दो हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विभाग का कहना है कि वनाग्नि रोकने में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।
12 घंटे की मशक्कत के बाद काबू हुई आग
चकराता के देवघर रेंज क्षेत्र में बुधवार रात लगी आग पर गुरुवार दोपहर तक काबू पाया गया। इस घटना में करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, हालांकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचाने में सफलता हासिल की। वनकर्मियों ने लगातार 12 घंटे तक अभियान चलाकर आग पर नियंत्रण पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
इधर त्यूणी और उत्तरकाशी के जंगल भी लगातार धधक रहे हैं। कई इलाकों में किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है और सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए हैं। देहरादून शहर में भी जंगलों, ट्रांसफॉर्मरों और दुकानों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और आग बुझाने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।




