उत्तर प्रदेशराज्य

IIT इंजीनियर से यूपी पुलिस के ‘सुपर कॉप’ तक… कौन हैं IPS राजीव कृष्ण, जो DGP की रेस में सबसे आगे?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को करीब चार साल बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की उम्मीद के बीच 1991 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी राजीव कृष्ण सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। दिल्ली में होने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अहम बैठक से पहले प्रशासनिक और पुलिस महकमे में उनके नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है। वर्तमान में कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी संभाल रहे राजीव कृष्ण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है।

मूल रूप से राजधानी लखनऊ के रहने वाले राजीव कृष्ण का जन्म 20 जून 1969 को हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित नौकरशाह परिवार से आते हैं। उन्होंने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान IIT रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 1991 में UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।

उनकी पत्नी मीनाक्षी सिंह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्तमान में आयकर विभाग में प्रिंसिपल इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात हैं।

पेपर लीक मुक्त भर्ती परीक्षा से बढ़ी साख

राजीव कृष्ण की हालिया उपलब्धियों में उत्तर प्रदेश पुलिस की ऐतिहासिक सिपाही भर्ती परीक्षा का सफल आयोजन सबसे अहम माना जा रहा है। कार्यवाहक DGP बनने से पहले वह डीजी विजिलेंस और यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत थे।

उनके नेतृत्व में 60 हजार से अधिक पदों वाली पुलिस भर्ती परीक्षा को बिना किसी पेपर लीक और विवाद के संपन्न कराया गया। इस परीक्षा को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराने के बाद प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि और मजबूत हुई।

हाईटेक पुलिसिंग और ‘ऑपरेशन पहचान’ से बनाई अलग पहचान

राजीव कृष्ण को तकनीक आधारित पुलिसिंग का विशेषज्ञ माना जाता है। एडीजी के पद पर रहते हुए उन्होंने अपराधियों की निगरानी और पहचान के लिए ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप की शुरुआत की थी। इस डिजिटल पहल के जरिए पुलिस को राज्य के शातिर अपराधियों की गतिविधियों पर ऑनलाइन निगरानी रखने में बड़ी मदद मिली।

पुलिस महकमे में उन्हें आधुनिक और तकनीकी सोच वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अपराध नियंत्रण में डिजिटल सिस्टम का प्रभावी इस्तेमाल किया।

आगरा में डकैतों के खिलाफ अभियान से हुए चर्चित

फील्ड पोस्टिंग के दौरान भी राजीव कृष्ण ने अपनी सख्त कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। वर्ष 2004 में आगरा के SSP रहते हुए उन्होंने चंबल के बीहड़ों में सक्रिय डकैतों और अपहरण गिरोहों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था।

उस समय फिरौती के लिए अपहरण और डकैती की घटनाओं से प्रभावित इलाके में उन्होंने लगातार कार्रवाई कर कानून व्यवस्था मजबूत की थी। अपराधियों के खिलाफ उनके सख्त रवैये की चर्चा आज भी पुलिस विभाग में होती है।

DGP की रेस में सबसे मजबूत दावेदार

उत्तर प्रदेश के स्थायी DGP पद के लिए UPSC पैनल में राजीव कृष्ण के अलावा 1990 बैच की IPS अधिकारी रेणुका मिश्रा और 1991 बैच के IPS पीयूष आनंद का नाम भी शामिल है। हालांकि प्रशासनिक गलियारों में राजीव कृष्ण को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

अगर उनके नाम पर मुहर लगती है तो करीब चार साल बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को स्थायी DGP मिलेगा।

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