अन्तर्राष्ट्रीय

G-20 समिट में मोदी ने आपदा के बाद कैसे हो जल्द पुनर्वास फॉर्मूले पर जापान से की बात…

जापान के ओसाका में जारी G-20 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों के प्रमुखों से मुलाकात की. अपने दोस्त और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर बात की. इस दौरान प्रधानमंत्री ने जापान से एक अनोखी मदद मांगी है, ये है आपदा के बाद जो तबाही मचती है उसके बाद किए जाने वाले पुनर्वास की.

पीएम मोदी ने आपदा के बाद पुनर्वास के लिए देशों का गठबंधन बनाने के प्रस्ताव पर समर्थन मांगा. इस द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय गठजोड़ बनाते हुए बांग्लादेश, म्यांमार और केन्या जैसे अन्य तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाओं में दोनों देशों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया.

गौरतलब है कि जापान की तकनीक भारत या दक्षिण एशिया के कई देशों से काफी आगे है. ऐसे में उसके अनुभवों का फायदा भारत उठा सकता है.

पीएम मोदी ने जापान से एक नई पहल के लिए भी समर्थन मांगा जिसकी शुरुआत इस साल बाद में की जाएगी. यह आपदा को लेकर लचीला इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए एक गठबंधन का प्रस्ताव है.

पहल के बारे में संक्षिप्त चर्चा में भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए जापान की मदद अहम है क्योंकि उसे आपदा प्रबंधन और आपदा के बाद पुनर्वास का अनुभव है.

‘बुलेट ट्रेन पर भी हुई बात’

विदेश सचिव विजय गोखले ने इस बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे की प्रगति और वाराणसी में कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की समीक्षा भी की. इन परियोजनाओं का निर्माण जापान की मदद से किया जा रहा है.

गोखले ने कहा कि बैठक के दौरान मोदी ने भारत में होने वाले सालाना द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए आबे को अपने आमंत्रण की बात दोहराई और विभिन्न मंत्रालय स्तर की बैठकों और विविध आदान-प्रदान के माध्यम से इसकी तैयारी के महत्व पर प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री (मोदी) ने खासतौर से भारत के पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में जापान द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की.”

गौरतलब है कि पिछले शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने एक्ट ईस्ट फोरम का गठन किया था जिसकी बैठक तीन बार हो चुकी है और सेतु, वन परियोजनाओं और सड़क निर्माण परियोजनाओं समेत कई परियोजनाओं पर पहले से काम चल रहा है.

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