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मध्य प्रदेश में तबादला नीति में बड़ा बदलाव संभव, स्वैच्छिक ट्रांसफर मांगने वालों को मिल सकती है प्राथमिकता

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार इस बार स्थानांतरण नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नई तबादला नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें स्वैच्छिक स्थानांतरण चाहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्राथमिकता दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।

सूत्रों के मुताबिक आगामी मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में नई स्थानांतरण नीति पेश की जा सकती है। सरकार का मानना है कि स्वैच्छिक तबादलों को प्राथमिकता देने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में उठाया था मुद्दा

बताया जा रहा है कि पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं इस विषय को उठाया था। उन्होंने कहा था कि स्वैच्छिक स्थानांतरण अधिक होने चाहिए, क्योंकि कई कर्मचारी व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं, लेकिन विभागीय प्राथमिकताएं अक्सर प्रशासनिक जरूरतों तक सीमित रह जाती हैं।

सरकार का मानना है कि इच्छित स्थान पर पदस्थापना मिलने से कर्मचारी बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं और उनकी उत्पादकता भी बढ़ती है।

स्वैच्छिक तबादलों से सरकार पर कम पड़ेगा आर्थिक बोझ

सूत्रों के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें सरकार को अतिरिक्त प्रशासनिक व्यय नहीं देना पड़ता। वहीं कर्मचारी अपनी पसंद की जगह पर पहुंचकर अधिक संतुष्टि के साथ काम कर पाते हैं।

इसी व्यावहारिक पहलू को ध्यान में रखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग प्रस्तावित नीति में यह प्रावधान जोड़ सकता है कि पहले स्वैच्छिक आवेदनों का गुण-दोष के आधार पर निराकरण किया जाए और उसके बाद प्रशासनिक आधार पर तबादलों पर विचार हो।

15 मई से 15 जून तक हट सकता है तबादलों पर प्रतिबंध

नई नीति के तहत 15 मई से 15 जून तक स्थानांतरण पर लगा प्रतिबंध हटाया जा सकता है। इसी अवधि में विभिन्न विभागों में तबादला प्रक्रिया पूरी किए जाने की संभावना है।

हालांकि सरकार द्वारा किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में आवेदन लंबित रह जाते हैं।

इन सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति

प्रस्तावित नीति के अनुसार अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।

शिक्षा विभाग के लिए अलग स्थानांतरण नीति बनाई जाएगी, हालांकि उसका आधार सामान्य प्रशासन विभाग की नीति ही रहेगी।

कलेक्टर और प्रभारी मंत्री की भूमिका भी अहम

ड्राफ्ट के अनुसार जिला और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर होने वाले तबादले कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।

वहीं प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री के समन्वय से किए जाने का प्रस्ताव है।

एक साल में दोबारा तबादले पर रोक संभव

सरकार इस बार यह प्रावधान भी जोड़ सकती है कि पिछले एक वर्ष में जिन कर्मचारियों का स्थानांतरण हो चुका है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे।

विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि में भी होंगे तबादले

सूत्रों के अनुसार गंभीर बीमारी, न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी स्थानांतरण किए जा सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य नई नीति के जरिए स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और कर्मचारी हितैषी बनाना बताया जा रहा है।

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