
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के पुणे स्थित खड़कवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की 150वीं पासिंग आउट परेड शनिवार को पूरे सैन्य गौरव और अनुशासन के साथ संपन्न हुई। खेतरपाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस भव्य समारोह की समीक्षा भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की। परेड के साथ कुल 353 कैडेट्स ने एनडीए से स्नातक होकर भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने की दिशा में अगला कदम बढ़ाया। इनमें 18 महिला कैडेट्स और 12 मित्र देशों के 24 विदेशी कैडेट्स भी शामिल रहे।
अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने इस अवसर को भावनात्मक बताते हुए कहा कि 42 वर्ष पहले वह स्वयं भी इसी परेड ग्राउंड से पास आउट हुए थे। उन्होंने कहा कि एनडीए केवल एक सैन्य प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ऐसी संस्था है जो युवाओं में राष्ट्रसेवा, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों का विकास करती है।
परेड में दिखी अनुशासन और नेतृत्व की मिसाल
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड कमांडर, सभी कैडेट्स और विभिन्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनडीए का प्रशिक्षण केवल सैन्य कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के नेताओं को तैयार करने का केंद्र भी है। सेना प्रमुख ने विदेशी कैडेट्स का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग देशों से आने के बावजूद एनडीए के साझा मूल्य और प्रशिक्षण उन्हें एक मजबूत बंधन में जोड़ते हैं, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मित्रता को और मजबूत करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर दिया सशक्त संदेश
अपने संबोधन के दौरान सेना प्रमुख ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में चुनौतियां केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि उनका स्वरूप लगातार बदल रहा है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे का जवाब सटीकता, बेहतर समन्वय और दृढ़ संकल्प के साथ देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि अभियान में दिखाई गई संयुक्त सैन्य क्षमता की बुनियाद एनडीए में मिलने वाले त्रि-सेवा प्रशिक्षण में निहित है।
सफल सैनिक के लिए बताए तीन सबसे जरूरी गुण
सेना प्रमुख ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी बनने के लिए तीन गुण सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं—एटीट्यूड, एडाप्टेबिलिटी और एबिलिटी। उनके अनुसार सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्ति की आंतरिक शक्ति का आधार होता है, जबकि अनुकूलन क्षमता बदलती परिस्थितियों में संतुलित और प्रभावी बने रहने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक क्षमता केवल तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं होती, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने और साथियों का विश्वास अर्जित करने की योग्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
महिला कैडेट्स की उपलब्धि की सराहना
जनरल द्विवेदी ने पास आउट हो रही 18 महिला कैडेट्स की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिला कैडेट्स ने सभी मानकों पर खुद को साबित किया है और परेड मैदान पर उनकी क्षमता किसी भी अन्य कैडेट से कम नहीं दिखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भविष्य के युद्धों में साहस, दक्षता और संकल्प का कोई लिंग नहीं होता। उनके अनुसार युद्ध और सैन्य नेतृत्व पूरी तरह जेंडर न्यूट्रल होते हैं।
परिवारों और प्रशिक्षकों को भी दिया श्रेय
सेना प्रमुख ने कैडेट्स की सफलता के पीछे उनके परिवारों और प्रशिक्षकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य अधिकारी की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि उसके परिवार के त्याग, धैर्य और प्रशिक्षकों की मेहनत का भी परिणाम होती है। उन्होंने सभी अभिभावकों और प्रशिक्षकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
‘सेवा परमो धर्मः’ के साथ किया संबोधन का समापन
अपने संबोधन के अंत में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एनडीए के आदर्श वाक्य ‘सेवा परमो धर्मः’ का उल्लेख किया। उन्होंने नए अधिकारियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि देश उनसे सर्वोच्च स्तर की प्रतिबद्धता, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना की अपेक्षा करता है।



