भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी, फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर तैनात होगी ब्रह्मोस मिसाइल; 2030 तक बड़ा लक्ष्य

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना अपने फ्रंटलाइन युद्धपोतों को और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। नौसेना ने युद्धपोतों पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तैनाती और मौजूदा जहाजों में इसके एकीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। योजना आने वाले वर्षों में नौसेना के बेड़े के बड़े हिस्से को ब्रह्मोस प्रणाली से लैस करने की है। जानकारी के अनुसार, 2030 तक प्रमुख युद्धपोतों पर ब्रह्मोस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
युद्धपोतों की मारक क्षमता बढ़ाने पर जोर
जानकारी के मुताबिक, पिछले एक साल में नौसेना के छह से अधिक युद्धपोतों को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लैस किया गया है। इसके साथ ही ब्रह्मोस सक्षम युद्धपोतों की कुल संख्या करीब 20 तक पहुंच गई है। नौसेना के नए कमीशन होने वाले जहाजों को पहले से ही ब्रह्मोस प्रणाली को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जबकि पुराने युद्धपोतों को भी आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जा रहा है।
ब्रह्मोस नौसेना की समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत करने वाले प्रमुख हथियारों में शामिल है। इसकी सुपरसोनिक गति और लंबी दूरी तक लक्ष्य को भेदने की क्षमता इसे समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस
पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की क्षमता को लेकर काफी चर्चा हुई थी। यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों की प्रमुख स्ट्राइक प्रणालियों में शामिल रही। इसकी सटीकता और प्रभावी मारक क्षमता ने इसे सैन्य अभियानों के लिहाज से महत्वपूर्ण हथियार के तौर पर स्थापित किया।
इसके बाद नौसेना ने युद्धपोतों में इस मिसाइल प्रणाली के व्यापक एकीकरण पर जोर बढ़ाया है। ब्रह्मोस अब केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित प्रणाली नहीं है, बल्कि वास्तविक सैन्य संचालन में इसकी उपयोगिता भी सामने आई है। समुद्री और तटीय लक्ष्यों के खिलाफ इसकी तेज गति और मारक क्षमता नौसेना की आक्रामक क्षमता को मजबूत करती है।
नए युद्धपोतों में डिजाइन स्तर से ब्रह्मोस की तैयारी
आधुनिक युद्ध तकनीक और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नई पीढ़ी के युद्धपोतों को ब्रह्मोस क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। नीलगिरी श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट्स में भी ब्रह्मोस प्रणाली को शामिल किया गया है। आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस हिमगिरी और आईएनएस महेंद्रगिरि जैसे युद्धपोतों में आठ वर्टिकल लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलों की व्यवस्था की गई है।
इन युद्धपोतों का निर्माण स्वदेशी डिजाइन के तहत किया गया है और इनमें उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इससे भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता और समुद्री मारक क्षमता दोनों को मजबूती मिल रही है।
220 से ज्यादा ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद को मिली थी मंजूरी
साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने नौसेना के युद्धपोतों के लिए 220 से ज्यादा ब्रह्मोस एक्सटेंडेड रेंज मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस खरीद के जरिए नौसेना के युद्धपोतों की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।
आने वाले वर्षों में नए युद्धपोतों में ब्रह्मोस के एकीकरण के साथ मौजूदा जहाजों के आधुनिकीकरण पर भी जोर रहेगा। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।



