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E20 पेट्रोल पर लोगों का भरोसा कमजोर! सर्वे में आधे से ज्यादा लोगों ने जताई चिंता, NDA समर्थकों में भी दिखी हिचक

नई दिल्ली: देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा देने की केंद्र सरकार की मुहिम को लेकर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक ताजा सी-वोटर सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी ई-20 पेट्रोल को लेकर सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। सर्वे के अनुसार, आधे से अधिक लोगों को आशंका है कि इससे उनकी गाड़ी की माइलेज कम हो सकती है और इंजन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

सरकार का दावा है कि ई-20 पेट्रोल से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और गन्ना किसानों को लाभ मिलेगा। हालांकि सर्वे में इन दावों को लेकर लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली।

NDA समर्थकों में भी दिखी झिझक

सर्वे का सबसे प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थकों में भी ई-20 पेट्रोल को लेकर पूरी सहमति नहीं दिखी। सर्वे के मुताबिक 52.5 प्रतिशत एनडीए समर्थकों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। केवल 18.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 29.5 प्रतिशत लोग अभी भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।

विपक्षी दलों के समर्थकों में विरोध और अधिक दिखाई दिया। 57.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ई-20 पेट्रोल का उपयोग नहीं करना चाहते। अन्य दलों के समर्थकों में भी 55 प्रतिशत लोगों ने इसे अस्वीकार किया। कुल मिलाकर 55.1 प्रतिशत लोगों ने ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इनकार किया, जबकि केवल 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसके पक्ष में राय दी।

गडकरी के बयान के बाद तेज हुई बहस

यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कोई भी ऐसा व्यक्ति सामने लाया जाए जिसकी गाड़ी को एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से नुकसान हुआ हो।

इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनके पास ऐसे छह वाहन मालिक हैं, जिनकी गाड़ियों पर ई-20 पेट्रोल का प्रतिकूल असर पड़ा है। उनका कहना है कि वे मीडिया के सामने आने से पहले केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करना चाहते हैं।

एथेनॉल मिश्रण नीति को भी सीमित समर्थन

सर्वे में एथेनॉल मिश्रण नीति पर भी लोगों की राय ली गई। 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति का समर्थन नहीं करते। इसके मुकाबले केवल 22 प्रतिशत लोगों ने इस नीति के पक्ष में राय दी, जबकि शेष लोग असमंजस में रहे।

एनडीए समर्थकों में भी 48.2 प्रतिशत लोगों ने नीति का विरोध किया। वहीं 24.4 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया और 27.4 प्रतिशत लोग कोई स्पष्ट राय नहीं दे सके।

माइलेज और इंजन को लेकर सबसे ज्यादा चिंता

सर्वे के अनुसार, 52.8 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज कम हो जाती है। एनडीए समर्थकों में 51.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 55.4 प्रतिशत लोगों ने भी यही आशंका जताई।

इंजन को नुकसान पहुंचने के सवाल पर 54.2 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अधिकांश वाहनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एनडीए समर्थकों में यह आंकड़ा 49.9 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 60.2 प्रतिशत रहा।

इसके अलावा 14.3 प्रतिशत लोगों का कहना था कि ई-20 केवल कुछ विशेष प्रकार के वाहनों को प्रभावित कर सकता है, जबकि 10.9 प्रतिशत लोगों ने माना कि इससे किसी भी वाहन को नुकसान नहीं होता।

पुराने वाहनों को लेकर भी चिंता बरकरार

सर्वे में 56.3 प्रतिशत लोगों ने माना कि ई-20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाना पुराने वाहनों के मालिकों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। एनडीए समर्थकों में 49.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 65.8 प्रतिशत लोगों ने इस राय का समर्थन किया।

लोग चाहते हैं दोनों विकल्प उपलब्ध रहें

सर्वे में एक मुद्दे पर व्यापक सहमति देखने को मिली। 75.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बाजार में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और सामान्य पेट्रोल दोनों उपलब्ध होने चाहिए, ताकि उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और वाहन की अनुकूलता के अनुसार ईंधन चुन सकें।

एनडीए समर्थकों में 72.4 प्रतिशत लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया। वहीं 74.5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि ई-20 पेट्रोल बेचा जाता है तो इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए। हालांकि कम कीमत के बावजूद केवल 40.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इसका उपयोग करेंगे, जबकि 40.4 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि वे सस्ता होने पर भी इसे नहीं अपनाएंगे।

सरकार के दावे पर बंटी राय

केंद्र सरकार का कहना है कि ई-20 नीति से देश का कच्चे तेल का आयात कम होगा। इस दावे से 37.2 प्रतिशत लोग पूरी तरह सहमत दिखे, जबकि 19.5 प्रतिशत लोगों ने आंशिक सहमति जताई। दूसरी ओर 17.1 प्रतिशत लोगों ने पूरी असहमति और 14.1 प्रतिशत लोगों ने आंशिक असहमति व्यक्त की।

जब लोगों से पूछा गया कि सरकार ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा क्यों दे रही है, तो 27.5 प्रतिशत लोगों ने कच्चे तेल के आयात में कमी को प्रमुख कारण बताया। 21.3 प्रतिशत लोगों ने गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाना मुख्य उद्देश्य माना, जबकि 11 प्रतिशत लोगों के अनुसार इसका लक्ष्य प्रदूषण कम करना है।

कैसे किया गया सर्वे?

सी-वोटर ने यह सर्वे 8 और 9 जुलाई के बीच कंप्यूटर असिस्टेड टेलीफोन इंटरव्यू (CATI) पद्धति से किया। इसमें देशभर के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,641 लोगों से बातचीत की गई। सर्वे के अनुसार, आंकड़ों को जनगणना और निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर जनसांख्यिकीय संरचना के अनुरूप वेटेज दिया गया। सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर मैक्रो स्तर पर ±3 प्रतिशत और माइक्रो स्तर पर ±5 प्रतिशत बताया गया।

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