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सोनम वांगचुक फिर सक्रिय, सरकार के सामने रखीं ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें; बोले- नहीं झुकेंगे

लेह: लद्दाख में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। वांगचुक समेत लद्दाख के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक में अपनी ऐसी मांगों की सूची रखी है, जिन्हें उन्होंने ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी गैर-समझौतावादी बताया है। प्रतिनिधियों ने लद्दाख के लिए वित्तीय अधिकारों वाली निर्वाचित विधानसभा, अलग लोक सेवा आयोग और 24 सितंबर 2025 की पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में न्याय व मुआवजे समेत कई मांगें केंद्र के सामने रखी हैं।

गृह मंत्रालय के सामने रखी मांगों की सूची

लेह में कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस, लेह एपेक्स बॉडी और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार को उन मुद्दों की सूची सौंपी, जिन्हें उन्होंने लद्दाख के लिए महत्वपूर्ण और गैर-समझौतावादी बताया।

बैठक में लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

लद्दाख के इन संगठनों और गृह मंत्रालय के बीच इससे पहले 22 मई को नई दिल्ली में औपचारिक बातचीत हुई थी।

विधानसभा को वित्तीय अधिकार देने की मांग

प्रतिनिधियों ने लद्दाख के लिए निर्वाचित विधानसभा की मांग के साथ उसे वित्तीय मामलों में प्रभावी अधिकार देने की बात रखी है। उनका कहना है कि विधानसभा को कराधान, बजट, खर्च, कर्ज लेने और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में सार्थक तथा संवैधानिक रूप से सुरक्षित नियंत्रण मिलना चाहिए।

इसके साथ ही प्रतिनिधियों ने संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त समेकित निधि और आकस्मिकता निधि की भी मांग रखी है।

सीधे निर्वाचित केंद्रशासित प्रदेश स्तर की विधानसभा की मांग

लद्दाख के प्रतिनिधियों ने सीधे निर्वाचित और संवैधानिक अधिकारों से लैस केंद्रशासित प्रदेश स्तर की विधानसभा को भी अपनी गैर-समझौतावादी मांगों में शामिल किया है।

उनका कहना है कि गृह मामलों से जुड़े अधिकांश विषयों को निर्वाचित सरकार और लद्दाख विधानसभा के लोकतांत्रिक नियंत्रण में रखा जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने इसे लद्दाख के राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए जरूरी बताया है।

अलग लोक सेवा आयोग और प्रशासनिक सेवाओं की मांग

प्रतिनिधियों ने लद्दाख के लिए अलग लोक सेवा आयोग गठित करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा अलग लद्दाख प्रशासनिक सेवा और लद्दाख पुलिस सेवा बनाने की मांग की गई है।

उन्होंने केंद्र से लद्दाख के लिए उपयुक्त और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप अलग कैडर की व्यवस्था करने की भी मांग की है।

24 सितंबर की पुलिस फायरिंग पर न्याय और मुआवजे की मांग

बैठक में 24 सितंबर 2025 को हुई पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने फायरिंग में मारे गए नागरिकों के लिए न्याय और सम्मानजनक मुआवजे की मांग की है।

उन्होंने फायरिंग और लाठीचार्ज से प्रभावित शहीदों, घायलों और अन्य पीड़ितों को उचित सहायता देने की मांग भी गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों के सामने रखी। घटना की पहली बरसी नजदीक आने के बीच प्रतिनिधियों ने इससे जुड़े सभी मामलों को बिना किसी शर्त वापस लेने की मांग वाला प्रस्ताव भी सौंपा है।

संवैधानिक समाधान तक अंतरिम सुरक्षा की मांग

लद्दाखी प्रतिनिधियों ने कहा कि वे क्षेत्र के लोगों के लोकतांत्रिक, संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्थायी संवैधानिक समाधान होने तक अंतरिम सुरक्षा की मांग रखी है।

उनका कहना है कि जब तक लद्दाख के लिए विशेष और क्षेत्र की जरूरत के अनुरूप संवैधानिक सुरक्षा उपाय तथा निर्वाचित केंद्रशासित प्रदेश स्तर की विधानसभा पूरी तरह स्थापित होकर काम नहीं करने लगती, तब तक जमीन, आर्थिक हितों और जनसांख्यिकीय हितों की उचित अंतरिम सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कारोबार और ट्रेड लाइसेंस के लिए LRC अनिवार्य करने की मांग

प्रतिनिधियों ने कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में वैध लद्दाख रेजिडेंस सर्टिफिकेट को अनिवार्य करने की मांग भी की है। उनके मुताबिक, कारोबार इकाइयों के पंजीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों की स्थापना और नियमन के साथ ट्रेड लाइसेंस जारी करने या उसके नवीनीकरण के लिए एलआरसी जरूरी होना चाहिए।

इसके अलावा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित लाभ और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को भी बनाए रखने की मांग की गई है।

पहले भी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं वांगचुक

सोनम वांगचुक इससे पहले भी लद्दाख के अधिकारों को लेकर हुए आंदोलनों में प्रमुख चेहरा रहे हैं। खबर के मुताबिक, जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए छात्र आंदोलन में भी वह प्रमुख भूमिका में थे। उन्होंने लंबे समय तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से उनकी मांगों को स्वीकार किया गया था।

अब एक बार फिर वांगचुक और लद्दाख के विभिन्न प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय के सामने अपनी मांगों को स्पष्ट तौर पर रखते हुए इन्हें गैर-समझौतावादी बताया है।

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