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छत्तीसगढ़ में 71 करोड़ का धान घोटाला! शॉर्टेज के नाम पर बड़ा खेल, जांच में सामने आया चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा

राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव संभाग में धान खरीदी से जुड़े एक बड़े वित्तीय अनियमितता मामले ने प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधीन आने वाले चार जिलों में धान शॉर्टेज के नाम पर करीब 71 करोड़ रुपये की कमी दर्शाए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के संकेत मिलने के बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।

चार जिलों में सामने आया करोड़ों रुपये का मामला

जानकारी के अनुसार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, खैरागढ़ और कबीरधाम (कवर्धा) जिले आते हैं। इन सभी जिलों में धान खरीदी प्रक्रिया के बाद धान शॉर्टेज के नाम पर करोड़ों रुपये की कमी दर्ज की गई। चारों जिलों को मिलाकर कुल 71 करोड़ रुपये का शॉर्टेज दर्शाया गया है, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कराई। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। बताया गया कि जिन वाहनों के लिए डीओ जारी किए गए थे, उनकी धर्मकांटा में तौल कराए जाने पर अधिकांश वाहनों में निर्धारित मात्रा से 8 से 10 किलोग्राम अधिक धान पाया गया।

ऐसी स्थिति में धान की भारी कमी या शॉर्टेज का दावा सवालों के घेरे में आ गया है। जांच से यह संकेत मिले हैं कि शॉर्टेज के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता और संभावित फर्जीवाड़ा किया गया हो सकता है।

कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है नुकसान

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि शासन स्तर पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग भी उठने लगी है।

सोसायटियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा ने बताया कि धान शॉर्टेज के मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन सोसायटियों में शॉर्टेज दर्ज किया गया है, वहां से संबंधित राशि जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हालांकि, जांच में सामने आए तथ्यों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तौल के दौरान वाहनों में निर्धारित मात्रा से अधिक धान पाया गया, तो आखिर 71 करोड़ रुपये का शॉर्टेज कैसे दर्ज हुआ। मामले की विस्तृत जांच और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर अब सभी की निगाहें प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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