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रेस्पिक्रिट 2026 में लखनऊ में श्वसन चिकित्सा के नए आयामों पर चर्चा

लखनऊ : 4वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन रेस्पिक्रिट 2026 का आयोजन रविवार को होटल हॉलिडे इन, लखनऊ में किया गया, जिसमें देशभर के प्रमुख श्वसन रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का आयोजन संजीविनी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गोमती नगर द्वारा एस.आर. चेस्ट फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। इस सम्मेलन में श्वसन रोग, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन के क्षेत्र में नवीनतम शोध और उपचार तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। देशभर से 300 से अधिक डॉक्टरों, विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इसमें भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन स्वामी मुक्ति नाथ आनंद द्वारा किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री प्रो. डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. एस.के. कटियार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मेलन में डॉ. एस.एन. गुप्ता (संस्थापक एवं आयोजन सचिव), डॉ. ममता गुप्ता, प्रो. सूर्यकांत (विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू) और प्रो. के.बी. गुप्ता सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे। डॉ. एस.एन. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक तकनीक केवल सुविधा नहीं है, बल्कि यह जल्दी निदान, बेहतर उपचार परिणाम और डॉक्टरों को अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद करती है।

प्रो. सूर्यकांत ने धूम्रपान के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 40 प्रकार के कैंसर और 25 अन्य बीमारियां धूम्रपान के कारण होती हैं। उन्होंने लोगों से धूम्रपान से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।सम्मेलन में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. अपार जिंदल ने भारत में फेफड़ा प्रत्यारोपण की प्रगति पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. दीपक तलवार (मेट्रो हॉस्पिटल, नोएडा) ने गंभीर अस्थमा में बायोलॉजिकल थेरेपी पर चर्चा की। डॉ. अनंत मोहन ने फेफड़ों के कैंसर की नई जांच तकनीकों की जानकारी दी और डॉ. शर्मिली सिन्हा (भुवनेश्वर) ने पल्मोनरी एम्बोलिज्म के प्रबंधन पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन के दौरान एडवांस वेंटिलेशन तकनीक, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी और नई दवाओं के विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। संजीविनी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जो अपनी आधुनिक सुविधाओं और मरीज-केंद्रित सेवाओं के लिए जाना जाता है, इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देता रहा है। सम्मेलन में फेफड़ों के स्वास्थ्य और स्लीप डिसऑर्डर के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान और रोकथाम संभव हो सके। रेस्पिक्रिट 2026 का समापन श्वसन रोगों से निपटने के लिए सहयोग, नवाचार और जागरूकता के संदेश के साथ हुआ।

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