मनरेगा को लेकर आ गया बड़ा अपडेट, मोदी सरकार ने जारी किए ₹17744 करोड़

केंद्र की मोदी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मजदूरी घटक के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली किस्त के रूप में 17,744 करोड़ रुपये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी कर दिए हैं। इस राशि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करना है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक काम की मांग में कोई असामान्य वृद्धि नहीं देखी गई है। हालांकि, सामान्य रूप से इस अवधि में विभिन्न राज्यों में रोजगार की मांग अधिक रहती है।
मनरेगा पूरी तरह संचालित रहेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वीबी-जी राम जी एक्ट ( VB-G Ram Ji Act ) के लागू होने तक मनरेगा योजना पूरी तरह से संचालित रहेगी। इस दौरान ग्रामीण मजदूरों को मांग के आधार पर काम उपलब्ध कराया जाएगा और समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि नए ढांचे में सुचारू संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान भी किए जाएंगे। आगामी योजना के तहत संशोधित मजदूरी दरों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। फिलहाल मौजूदा अधिसूचित मजदूरी दरें ही लागू रहेंगी और मजदूरों को बिना किसी रुकावट के भुगतान जारी रहेगा।
रोजगार निरंतरता पर जोर
इस फंड रिलीज से निकट भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग और आपूर्ति दोनों को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने सभी राज्यों से अपील की है कि जारी किए गए फंड का समयबद्ध और प्रभावी उपयोग किया जाए ताकि मजदूरों को भुगतान में कोई देरी न हो। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। योजना में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), प्रभावी निगरानी और चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के नवीनतम चरण में लगभग 12,100 किलोमीटर सड़कों को मंजूरी दी गई है और वर्तमान में निविदा प्रक्रिया चल रही है।
81500 करोड़ से अधिक जारी
17 मार्च 2026 को लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष ( 2025-26 ) में मनरेगा के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 81500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने बताया कि मजदूरी भुगतान प्रत्यक्ष नकद अंतरण (DBT) के माध्यम से लगातार किया जा रहा है। 11 मार्च 2026 तक राज्यों में कुल लंबित देनदारियां लगभग 18,862 करोड़ रुपये थीं, जिनमें मजदूरी के लिए 8,688.29 करोड़ रुपये, सामग्री के लिए 9,692.28 करोड़ रुपये और प्रशासनिक व्यय के लिए 502.42 करोड़ रुपये शामिल हैं।
मंत्री ने यह भी बताया था कि 2025-26 के दौरान 11 मार्च 2026 तक कुल 81,502.62 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, जिसमें मजदूरी भुगतान के लिए 65,875.13 करोड़ रुपये और सामग्री व प्रशासनिक मद के लिए 15,627.48 करोड़ रुपये शामिल हैं।



