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चांदी के आयात पर सरकार का बड़ा फैसला, नियम सख्त किए; अब बिना लाइसेंस नहीं हो सकेगा इंपोर्ट

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए नियमों को तत्काल प्रभाव से सख्त कर दिया है। सरकार ने चांदी की आयात नीति में बदलाव करते हुए इसे ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया है। इसके बाद अब चांदी के आयात के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह नियम तुरंत लागू कर दिया गया है। नए आदेश में सोने और प्लैटिनम से चढ़ी चांदी को भी शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले का असर घरेलू बाजार, व्यापार संतुलन और कीमती धातुओं के कारोबार पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

अब सरकारी अनुमति के बिना नहीं होगा आयात

अब तक चांदी का आयात ‘मुक्त’ श्रेणी के अंतर्गत आता था, यानी आयातकों को इसे विदेशों से मंगाने के लिए विशेष सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद आयातकों को पहले सरकार से लाइसेंस लेना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चांदी के आयात पर नियंत्रण बढ़ेगा और आयात प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक सख्त और जटिल हो जाएगी।

सीमा शुल्क बढ़ाने के बाद दूसरा बड़ा कदम

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब कुछ दिन पहले ही कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई थी। 13 मई को सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।

इसे सरकार का लगातार दूसरा बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करना और व्यापार संतुलन को मजबूत करना बताया जा रहा है।

घरेलू बाजार पर पड़ सकता है असर

नई आयात नीति और बढ़े हुए शुल्क का असर देश के सर्राफा बाजार और कीमती धातुओं के कारोबार पर देखने को मिल सकता है। आयात महंगा होने से चांदी की कीमतों और व्यापार गतिविधियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

व्यापार जगत के जानकारों के अनुसार सरकार के इन फैसलों से आयात पर निगरानी मजबूत होगी और घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की आपूर्ति और कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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