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CNG Price Hike: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG ने बढ़ाई टेंशन, दिल्ली में ₹2 प्रति किलो महंगी हुई गैस, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ

नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। राजधानी दिल्ली में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG की कीमत में ₹2 प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया है। नई दरें लागू होने के बाद अब दिल्ली में CNG ₹79.09 प्रति किलो की दर से मिलेगी, जबकि इससे पहले इसकी कीमत ₹77.09 प्रति किलो थी।

दिल्ली में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब एक दिन पहले ही मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में भी CNG के दाम बढ़ाए गए थे। महानगर गै लिमिटेड ने मुंबई क्षेत्र में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी की थी। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव और होर्मुज़ क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं ने गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। इसका सीधा असर अब देश के आम उपभोक्ताओं पर दिखाई देने लगा है।

इससे पहले शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोल ₹3.14 प्रति लीटर महंगा होकर दिल्ली में ₹97.77 प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल की कीमत में ₹3.11 प्रति लीटर का इजाफा दर्ज किया गया। नई कीमतें तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दी गई हैं।

सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि CNG की कीमत बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन का खर्च बढ़ सकता है। दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहरों में ऑटो, टैक्सी और बसों का बड़ा हिस्सा CNG पर निर्भर है। ऐसे में आने वाले दिनों में किराए बढ़ने की संभावना भी तेज हो गई है। रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए यह फैसला जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

महंगाई पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों से प्रभावित है और अब CNG महंगी होने से परिवहन लागत में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसका असर रोजमर्रा की जरूरतों और बाजार की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

तेल कंपनियों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और LPG पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी हो रही है। उनके मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उसी अनुपात में कीमतें नहीं बढ़ा पा रही हैं। इससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति लगातार दबाव में बनी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर हर महीने लगभग ₹14,000 करोड़ के राजस्व का त्याग कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद तेल कंपनियों का नुकसान कम नहीं हो रहा।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी चेतावनी दी है कि यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहीं तो वित्त वर्ष 2026 में सरकारी तेल कंपनियों का पूरा मुनाफा खत्म हो सकता है। CII वार्षिक बिजनेस समिट 2026 में उन्होंने कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट के कारण तेल कंपनियों को रोजाना करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार और तेल कंपनियों के अनुमान के मुताबिक तिमाही नुकसान करीब ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। वहीं वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे आपूर्ति संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में करीब ₹1.2 लाख करोड़ के संयुक्त नुकसान का अनुमान है। ऐसे में आने वाले समय में ईंधन की कीमतों को लेकर आम जनता की चिंता और बढ़ सकती है।

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