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भारत के सामने ‘डबल खतरा’! चीन-पाकिस्तान को लेकर IISS रिपोर्ट में बड़ा अलर्ट, ‘नो वॉर-नो पीस’ स्थिति का जिक्र

नई दिल्ली: एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर जारी एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने भारत की रणनीतिक चुनौतियों को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं। लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए आने वाले समय में चीन और पाकिस्तान दोनों सबसे बड़ी सुरक्षा चिंतियां बने रहेंगे। रिपोर्ट में “न युद्ध, न शांति” जैसी हाइब्रिड स्थिति को भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा बताया गया है।

यह रिपोर्ट सिंगापुर में होने वाले प्रतिष्ठित शंगरी-ला डायलॉग से ठीक पहले जारी की गई है, जहां दुनिया के कई बड़े रक्षा मंत्री और सुरक्षा विशेषज्ञ हिस्सा लेने वाले हैं।

चीन और पाकिस्तान से घिरा भारत

करीब 150 पन्नों की ‘एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सुरक्षा आकलन’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने दोनों परमाणु-संपन्न पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान के साथ लंबे समय से सीमा विवादों का सामना कर रहा है। यही वजह है कि भारत लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को बड़े पारंपरिक युद्ध अभियानों के अनुरूप मजबूत कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत-चीन सीमा विवाद अपेक्षाकृत पारंपरिक स्वरूप के रहे हैं और इनके भारत-पाकिस्तान संघर्षों जैसी गंभीर स्थिति में बदलने की संभावना कम मानी जाती है। हालांकि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बने रहने की आशंका जताई गई है।

‘नो वॉर-नो पीस’ की स्थिति सबसे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सामने सबसे कठिन स्थिति “नो वॉर, नो पीस” यानी न युद्ध और न पूरी शांति वाली स्थिति है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह हाइब्रिड संघर्ष की स्थिति है, जिसमें सीमित सैन्य तनाव, सीमा पार गतिविधियां और रणनीतिक दबाव लगातार जारी रहते हैं।

IISS ने कहा कि भारत की सैन्य रणनीति कई युद्धों और सीमा संघर्षों के अनुभवों से विकसित हुई है, खासतौर पर पाकिस्तान के संदर्भ में।

सर्जिकल स्ट्राइक का भी जिक्र

रिपोर्ट में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 2016, 2019 और 2025 में किए गए सैन्य अभियानों ने यह दिखाया कि नई दिल्ली ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी सैन्य प्रतिक्रिया की नीति में बदलाव किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति ने सैन्य रणनीति को नया स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ताइवान मुद्दे से दूरी बनाए रखना चाहेगा भारत

IISS की रिपोर्ट में अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत व्यापक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय सैन्य भूमिका निभाने से फिलहाल बचना चाहेगा और ताइवान को लेकर अमेरिका-चीन टकराव में सीधे शामिल होने से दूरी बनाए रखेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को मुख्य रूप से हिंद महासागर क्षेत्र और अपने सीमावर्ती सुरक्षा ढांचे तक केंद्रित रखना चाहता है।

हिंद महासागर और मलक्का स्ट्रेट पर बढ़ी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

रिपोर्ट में हिंद महासागर क्षेत्र और मलक्का जलडमरूमध्य को भी अहम भू-राजनीतिक केंद्र बताया गया है। इसमें कहा गया है कि चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और समुद्री उपस्थिति के कारण इस क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा केंद्र बन सकता है।

शंगरी-ला डायलॉग में दुनिया की नजरें

सिंगापुर में 29 से 31 मई के बीच आयोजित होने वाले शंगरी-ला डायलॉग में दुनिया के कई देशों के रक्षा मंत्री, सैन्य अधिकारी और रणनीतिक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस बार चीन, ताइवान, हिंद महासागर और भारत-पाकिस्तान सुरक्षा मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

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