
नई दिल्ली: दिनभर की थकान के बाद अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी होती है। लेकिन कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी लंबे समय तक सो नहीं पाते और रातभर करवटें बदलते रहते हैं। अक्सर इसकी वजह केवल तनाव को माना जाता है, जबकि कई बार रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें भी नींद को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की दिनचर्या और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके बेहतर और गहरी नींद पाई जा सकती है।
किन वजहों से नहीं आती अच्छी नींद?
हर बार अनिद्रा का कारण तनाव नहीं होता। कई बार रोज अलग-अलग समय पर सोना और उठना शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी को प्रभावित कर देता है, जिससे रात में नींद आने में परेशानी हो सकती है।
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, टीवी या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करने से भी दिमाग सक्रिय बना रहता है। इनकी तेज रोशनी शरीर को जागे रहने का संकेत देती है, इसलिए सोने से कम से कम आधा घंटा पहले इनका उपयोग बंद करना बेहतर माना जाता है।
शाम या रात के समय अधिक मात्रा में चाय या कॉफी पीने से भी नींद आने में देरी हो सकती है। ऐसे समय में गुनगुना दूध या सादा पानी बेहतर विकल्प हो सकता है।
दिन में लंबे समय तक सोने की आदत भी रात की नींद खराब कर सकती है। जरूरत हो तो दिन में थोड़ी देर ही आराम करना उचित माना जाता है।
पूरे दिन शारीरिक गतिविधि की कमी भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। नियमित रूप से पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना लाभदायक हो सकता है।
अच्छी और गहरी नींद के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें या हाथ-पैर धो लें। इससे शरीर को आराम महसूस होता है और नींद आने में मदद मिल सकती है।
सोने वाले कमरे की रोशनी हल्की रखें, शोर-शराबे से बचें और साफ-सुथरे तथा आरामदायक बिस्तर का उपयोग करें, ताकि नींद का माहौल बेहतर बन सके।
रात का भोजन हल्का और समय पर करें। अधिक तला-भुना या भारी भोजन पाचन को प्रभावित कर सकता है, जिससे नींद में बाधा आ सकती है।
यदि नींद नहीं आ रही है तो मोबाइल देखने की बजाय कोई किताब पढ़ें या हल्का और सुकून देने वाला संगीत सुनें।
अगर 20 से 30 मिनट तक बिस्तर पर लेटने के बाद भी नींद न आए तो लगातार करवटें बदलने के बजाय कुछ देर उठकर शांत वातावरण में बैठें, हल्की किताब पढ़ें और नींद महसूस होने पर दोबारा बिस्तर पर जाएं।
सुबह कुछ समय धूप में बिताने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी बेहतर तरीके से काम करती है, जिससे रात में आसानी से नींद आने में मदद मिल सकती है।
रोजाना कुछ समय खुली हवा में टहलना या बैठना भी शरीर और दिमाग को आराम देने में सहायक हो सकता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
यदि कई सप्ताह तक लगातार नींद नहीं आती, तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या होती है या दिनभर अत्यधिक नींद और थकान महसूस होती है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।



