झारखण्डराज्य

हलाला के बाद पूर्व पति ने दोबारा शादी से किया इनकार, झारखंड हाई कोर्ट ने कहा- यह अपराध नहीं; आरोपी को अग्रिम जमानत

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने तलाक, हलाला और दोबारा निकाह से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि तलाक के बाद हलाला की प्रक्रिया पूरी होने और महिला के दूसरी शादी कर लेने के बाद अगर पूर्व पति उससे दोबारा शादी करने से इनकार करता है, तो महज इस इनकार के आधार पर उसके खिलाफ नया आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। अदालत ने आरोपी पति इमरान हुसैन को अग्रिम जमानत भी दे दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दोबारा शादी से इनकार करना न तो संज्ञेय अपराध है और न ही मुस्लिम व्यक्तिगत कानून या सामान्य आपराधिक कानून के तहत इसे अपने आप कानूनी गलती माना जा सकता है। अदालत के सामने ऐसा कोई कानूनी प्रावधान भी नहीं रखा गया, जिसके तहत पत्नी पूर्व पति को दोबारा शादी के लिए मजबूर कर सके या केवल उसके इनकार पर नया आपराधिक मुकदमा दर्ज करा सके।

गिरिडीह के धनवार का है मामला

यह मामला गिरिडीह के धनवार थाना क्षेत्र का है। गिरफ्तारी की आशंका के चलते इमरान हुसैन ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। उसके खिलाफ धनवार थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2019 की अलग-अलग धाराएं लगाई गई थीं।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी तरह के आरोपों को लेकर वर्ष 2020 में भी मामला दर्ज हुआ था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। इसके बाद दोनों का तलाक हो गया और महिला ने किसी दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली। बाद में महिला ने इमरान के दोबारा शादी नहीं करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई, जिसे आगे चलकर प्राथमिकी में बदल दिया गया।

महिला ने कहा- दोबारा शादी का दिया था आश्वासन

महिला की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि पहले हुए समझौते के दौरान इमरान ने उससे दोबारा शादी करने का आश्वासन दिया था। महिला का आरोप है कि बाद में इमरान ने अपने इस आश्वासन से इनकार कर दिया और दोबारा शादी नहीं की। इसी आधार पर उसके खिलाफ शिकायत की गई थी।

अदालत ने रिकॉर्ड में क्या पाया

जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत ने मामले के रिकॉर्ड पर गौर करते हुए पाया कि दोनों के बीच तलाक हो चुका है और महिला पहले ही दूसरे व्यक्ति से शादी कर चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इमरान हुसैन को अग्रिम जमानत देने का फैसला किया।

हाई कोर्ट ने आरोपी को तीन सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी की स्थिति में 25 हजार रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों पर उसे जमानत दी जाए।

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