CG Viral Fever: छत्तीसगढ़ में वायरल फीवर का बदला रूप, रोजाना पहुंच रहे 100 से ज्यादा मरीज; प्लेटलेट गिरने से बढ़ी चिंता

रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शहर से लेकर गांव तक बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक मरीज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते अस्पताल के वार्डों में बिस्तरों की कमी पड़ने लगी है।
दस दिन बाद भी नहीं उतर रहा बुखार
चिकित्सकों के मुताबिक इस बार वायरल बुखार का असर पहले की तुलना में अलग दिखाई दे रहा है। सामान्य वायरल बुखार जहां चार से पांच दिन में ठीक हो जाता था, वहीं अब कई मरीजों में दस दिन बाद भी बुखार बना हुआ है। कई मामलों में बुखार दोबारा लौट रहा है, जबकि बदन दर्द लंबे समय तक रहने के साथ मरीजों को कई हफ्तों तक कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
प्लेटलेट तेजी से गिरने से बढ़ी चिंता
वायरल संक्रमण के बीच सबसे चिंताजनक स्थिति उन मरीजों में सामने आ रही है, जिनका प्लेटलेट काउंट तेजी से कम हो रहा है। सामान्य वायरल बुखार में प्लेटलेट पर इतना असर आमतौर पर नहीं देखा जाता, लेकिन इस बार कई मरीजों की रिपोर्ट में गिरावट सामने आने से डेंगू जैसे लक्षणों की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। प्लेटलेट कम होने की स्थिति में मरीज की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए परिजनों और अस्पताल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
अस्पताल के संसाधनों पर बढ़ा दबाव
मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या का सीधा असर जिला अस्पताल के संसाधनों पर पड़ रहा है। वार्डों में जगह की कमी, जांच के लिए लंबा इंतजार और स्वास्थ्यकर्मियों पर बढ़ते काम के दबाव के कारण कई परिवार निजी क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों का रुख करने को मजबूर हैं। सरकारी अस्पताल में भीड़ अधिक होने से इलाज में देरी की स्थिति भी सामने आ रही है।
एक ही परिवार में कई लोग बीमार
रायगढ़ के कई मोहल्लों में एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों के एक साथ बुखार की चपेट में आने की बात सामने आ रही है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर देखा जा रहा है। इससे अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। बाजारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी वायरल बुखार को लेकर चर्चा बढ़ गई है।
वायरस में बदलाव से इलाज में लग रहा ज्यादा समय
चिकित्सकों का कहना है कि वायरस के म्यूटेट होने के कारण उसकी प्रकृति में बदलाव आया है। इसके चलते पुराने इलाज के तरीके और दवाइयां पहले की तरह प्रभावी नहीं हो पा रही हैं। इसी वजह से मरीजों को स्वस्थ होने में सामान्य से अधिक समय लग रहा है और कुछ मामलों में जटिलताएं भी देखने को मिल रही हैं।
जिला अस्पताल रायगढ़ के सिविल सर्जन दिनेश पटेल ने बताया कि वायरल फीवर अपना सायकल पूरा करता है। बुखार के कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे मरीज की हालत में सुधार होने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। वायरस की प्रकृति में बदलाव भी मरीजों के ठीक होने में लगने वाले समय को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बुखार लगातार बना रहे या कमजोरी अधिक महसूस हो तो जांच कराने में देरी न करें।



