स्वास्थ्य

शरीर में दिख रहे हैं ये बदलाव तो हो सकता है हीमोग्लोबिन कम होने का संकेत, डाइट में शामिल करें ये चीजें

नई दिल्ली: शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। भारत में सभी उम्र की लगभग 51 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से प्रभावित होती हैं। हालांकि, सिर्फ महिलाओं ही नहीं, बल्कि किसी भी उम्र और लिंग के व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होना परेशानी का कारण बन सकता है। हीमोग्लोबिन का मुख्य काम शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाना है और इसकी कमी को चिकित्सकीय रूप से एनीमिया कहा जाता है। इससे कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती हैं।

हीमोग्लोबिन कम होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आ सकते हैं। लगातार बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, त्वचा का पीला पड़ना, कमजोरी रहना, दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द और सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

महिलाओं में हीमोग्लोबिन कम होने की वजह

महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। रोजाना के भोजन में पर्याप्त आयरन न मिलना इसकी एक प्रमुख वजह हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान भी शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो सकती है। इसके अलावा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, ज्यादा जंक फूड का सेवन और शरीर में विटामिन व कैल्शियम की कमी भी हीमोग्लोबिन कम होने से जुड़ी हो सकती है।

आयरन से भरपूर चीजों को डाइट में करें शामिल

अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी है तो रोजाना के भोजन में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ाने की सलाह दी जाती है। मांस, मछली, सोयाबीन, टोफू, अंडे, नट्स, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीट्स, गाजर और चुकंदर जैसे खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

विटामिन सी वाले फल भी फायदेमंद

आयरन के साथ विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थों को भी भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसके लिए अंगूर, नींबू, संतरा, आम और कीवी जैसे फलों का सेवन किया जा सकता है। स्रोत के अनुसार, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स सप्लीमेंट और चॉकलेट को भी डाइट में शामिल करने की सलाह दी गई है।

हीमोग्लोबिन ज्यादा कम हो तो डॉक्टर से लें सलाह

अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी ज्यादा है या ऊपर बताए गए लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत के अनुसार चिकित्सक जांच और उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं।

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