परमाणु ऊर्जा में बड़ा बदलाव: भारत में निजी और विदेशी कंपनियों की एंट्री का रास्ता साफ, कड़े सुरक्षा नियमों के बीच खुलेगा सेक्टर

नई दिल्ली: भारत ने निजी क्षेत्र के लिए परमाणु बिजली उत्पादन का रास्ता खोलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। शुक्रवार को प्रस्तावित मसौदा नियमों में निजी परमाणु बिजली परियोजनाओं के लिए कड़ी निगरानी वाली मंजूरी व्यवस्था का खाका पेश किया गया। इसके साथ ही ऐसे विदेशी रिएक्टरों की तकनीक के लिए भी रास्ता खुल सकता है, जिनका संचालन और सुरक्षा के मामले में पहले से स्थापित रिकॉर्ड मौजूद है।
मंजूरी से लेकर संचालन तक कई चरणों में होगी निगरानी
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, कंपनियां औपचारिक लाइसेंस हासिल करने से पहले विक्रेताओं के साथ जुड़ने, शुरुआती विकास कार्य शुरू करने और परियोजना के लिए जमीन सुरक्षित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी हासिल कर सकेंगी। लाइसेंस मिलने के बाद परियोजना को डिजाइन, स्थल चयन, निर्माण, कमीशनिंग और संचालन जैसे अलग-अलग चरणों में नियामकीय जांच से गुजरना होगा।
मसौदा नियमों में नियामक को व्यापक निगरानी अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसके तहत परियोजना के किसी खास चरण में नियमों के अनुपालन या सुरक्षा से जुड़ी जरूरत पूरी न होने पर काम रोकने की क्षमता भी नियामक के पास होगी।
भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र लंबे समय से मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा है। वर्ष 1974 में हुए परमाणु परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कई दशकों तक देश की विदेशी परमाणु ईंधन और तकनीक तक पहुंच भी सीमित रही।
परमाणु ऊर्जा कानून में बदलाव के बाद निजी क्षेत्र के लिए खुला रास्ता
पिछले साल भारत ने परमाणु ऊर्जा कानून में बदलाव किया था। इसका उद्देश्य निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण और संचालन की अनुमति देने का रास्ता तैयार करना था। हालांकि, लाइसेंसिंग और रणनीतिक परमाणु सामग्री से जुड़े नियंत्रण सरकार के पास बनाए रखने की व्यवस्था की गई।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश है। सरकार अगले दो दशकों में देश की परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता को करीब 12 गुना बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश और विदेशी परमाणु तकनीक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अडानी, टाटा और रिलायंस समेत निजी समूहों पर नजर
रॉयटर्स की पूर्व रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए अडानी ग्रीन, टाटा पावर और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत देश के बड़े निजी समूहों को आमंत्रित किया था। परमाणु ऊर्जा कानून में किए गए बदलावों में दुर्घटना की स्थिति में परमाणु उपकरण आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी को सीमित करने का प्रावधान भी शामिल था।
आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी का मुद्दा लंबे समय से विदेशी कंपनियों के लिए चिंता का विषय रहा है। नियमों में बदलाव का एक उद्देश्य जनरल इलेक्ट्रिक, वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक और ईडीएफ जैसे विदेशी परमाणु तकनीक आपूर्तिकर्ताओं की भारत के परमाणु ऊर्जा बाजार में रुचि बढ़ाना भी है।
विदेशी रिएक्टरों के लिए ऑपरेटिंग रिकॉर्ड जरूरी
जनता से सुझाव लेने के लिए जारी किए गए मसौदा नियमों में ऐसे रिएक्टर डिजाइन को अनुमति देने का प्रस्ताव है, जिनका विदेश में पहले से संचालन रिकॉर्ड मौजूद हो। इसके लिए डेवलपर्स को अपने संबंधित देश में रिएक्टर की लाइसेंसिंग और संचालन से जुड़ा अनुभव तथा रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा।
परमाणु बिजली परियोजनाओं के डेवलपर्स को परमाणु दायित्व, परियोजना को बंद करने की प्रक्रिया और परमाणु कचरे के प्रबंधन से जुड़े दायित्वों के लिए वित्तीय सुरक्षा भी बनाए रखनी होगी। इसके अलावा रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर विस्तृत योजना प्रस्तुत करना भी जरूरी होगा।



