पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सियासी संग्राम तेज, BJP शासित राज्यों में राहत तो विपक्षी राज्यों में जनता पर टैक्स का बोझ

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संकट के असर से देशभर में ईंधन की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। मई महीने में पेट्रोल और डीजल के दामों में चौथी बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बीच, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सियासत भी गरमा गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश में सबसे सस्ता पेट्रोल मुख्य रूप से भाजपा शासित राज्यों में मिल रहा है, जबकि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन शासित राज्यों में ईंधन की कीमतें सबसे ज्यादा हैं।
भाजपा शासित राज्यों में सबसे सस्ता पेट्रोल
देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि गुजरात में यह करीब 101 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गोवा और असम जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी पेट्रोल 102 रुपये या उससे कम कीमत पर उपलब्ध है। इन राज्यों में वैट की दरें अपेाकृत कम होने के कारण आम लोगों को राहत मिल रही है।
दक्षिणी राज्यों में सबसे महंगा ईंधन
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दलों के शासन वाले दक्षिण भारतीय राज्यों में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। तेलंगाना में पेट्रोल 118 रुपये प्रति लीटर के पार निकल चुका है। केरल में पेट्रोल 114.9 रुपये प्रति लीटर और कर्नाटक में 110.3 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों में सबसे अधिक वैट और अतिरिक्त उपकर लगाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
चार दिन में 7.5 रुपये तक बढ़े दाम
आंकड़ों के अनुसार, इस महीने महज चार दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सीधे सब्सिडी देने वाले खाड़ी देशों को छोड़ दें तो यह वृद्धि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी सीमित मानी जा रही है।
आंध्र और केरल में अतिरिक्त टैक्स का बोझ
आंध्र प्रदेश में पेट्रोल पर 31 प्रतिशत वैट के साथ 4 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस लगाया जा रहा है। इससे प्रभावी कर दर करीब 35 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। वहीं केरल में भी मूल वैट के अलावा सामाजिक सुरक्षा उपकर वसूला जा रहा है। इसी वजह से इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर बनी हुई हैं।
केंद्र बनाम राज्यों के टैक्स पर बढ़ी बहस
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार पर लगातार एक्साइज ड्यूटी घटाने का दबाव बनाने वाले कई विपक्षी राज्यों ने अपने स्तर पर वैट में कोई कटौती नहीं की है। बताया जा रहा है कि 27 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम किए जाने के बाद भाजपा शासित राज्यों ने इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया था।
ईंधन की कीमतों को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज
ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर अब केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स नीति पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां केंद्र सरकार को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं भाजपा का दावा है कि पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स विपक्षी दलों की सरकारें वसूल रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों का मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।



