
नई दिल्ली: केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सस्पेंस अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज करने के बावजूद पार्टी अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बना सकी है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली में केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक कर पूरे विवाद और अंदरूनी हालात की समीक्षा की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राहुल गांधी ने खास तौर पर सोशल मीडिया और संगठन स्तर पर चल रही “वेणुगोपाल बनाम सतीशन” की खींचतान पर सवाल उठाए। उन्होंने नेताओं से पूछा कि यह माहौल स्वाभाविक रूप से बन रहा है या फिर इसे योजनाबद्ध तरीके से हवा दी जा रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में के.सी. वेणुगोपाल और वी.डी. सतीशन सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। दोनों नेताओं के समर्थक सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं, जिससे पार्टी के भीतर हलचल लगातार बढ़ती जा रही है।
8 दिन बाद भी नहीं हो सका फैसला
140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन को 102 सीटों के साथ बड़ी जीत मिली थी। हालांकि चुनाव परिणाम घोषित होने के आठ दिन बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं हो सका है। इस देरी को लेकर पार्टी के अंदर बेचैनी बढ़ने लगी है, जबकि विपक्ष भी कांग्रेस पर निशाना साध रहा है।
कांग्रेस नेता सनी जोसेफ ने भी माना कि मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी से गठबंधन की ऐतिहासिक जीत की चमक फीकी पड़ रही है। वहीं वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने संकेत दिए हैं कि अगले 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जा सकता है।
तीन नेताओं के बीच तेज हुई दौड़
मुख्यमंत्री पद की रेस में वेणुगोपाल और सतीशन के अलावा रमेश चेन्निथला का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में वेणुगोपाल को विधायकों का मजबूत समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि 50 से अधिक विधायक उनके पक्ष में खड़े हैं।
दूसरी ओर, वी.डी. सतीशन को पार्टी कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों के बीच काफी लोकप्रिय माना जा रहा है। पिनराई विजयन सरकार के खिलाफ विपक्ष के नेता के तौर पर उनके आक्रामक तेवरों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में मजबूत दावेदार बना दिया है।
सहयोगी दलों की भी बढ़ी बेचैनी
यूडीएफ के सहयोगी दल भी मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी से असहज नजर आ रहे हैं। गठबंधन के नेताओं का मानना है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो इसका राजनीतिक संदेश गलत जा सकता है और सरकार गठन की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
अब पूरे मामले में कांग्रेस हाईकमान की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अगले 48 घंटों के भीतर केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।



