बहुत ज्यादा सोना भी सेहत के लिए बन सकता है खतरा, फर्टिलिटी से लेकर डायबिटीज तक पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली: शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। अच्छी नींद दिनभर की थकान दूर करने के साथ शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है। हालांकि जरूरत से ज्यादा सोना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक ज्यादा सोने की आदत शरीर की जैविक घड़ी और दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। इसका असर सिरदर्द, पीठ दर्द, थकान और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ कुछ मामलों में प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है।
ज्यादा सोने से हो सकता है सिरदर्द
बहुत देर तक सोने के बाद उठने पर कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत होती है। शरीर में बनने वाला सेरोटोनिन नींद और जागने के चक्र को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। जरूरत से ज्यादा सोने से इस चक्र पर असर पड़ सकता है। देर से उठने के बाद अचानक भूख या तेज प्यास लगने से भी सिरदर्द की समस्या महसूस हो सकती है।
पीठ दर्द की बढ़ सकती है परेशानी
लंबे समय तक सोने की आदत पीठ दर्द की समस्या को बढ़ा सकती है। खासकर अगर गद्दा ठीक नहीं है या सोने की मुद्रा सही नहीं है, तो लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे उठने के बाद पीठ और शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द महसूस हो सकता है।
ज्यादा नींद और अवसाद का भी संबंध
बहुत ज्यादा सोने और अवसाद के बीच भी संबंध बताया गया है। कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा सोना अवसाद का एक लक्षण हो सकता है। वहीं, नींद और जागने का चक्र लगातार बिगड़ने से तनाव और मानसिक दबाव की समस्या बढ़ सकती है। इसका असर व्यक्ति की दिनभर की गतिविधियों और सामान्य दिनचर्या पर भी पड़ सकता है।
ज्यादा सोने के बाद भी बनी रहती है थकान
अगर लंबे समय तक सोने के बावजूद दिनभर सुस्ती और थकान महसूस होती है, तो यह नींद के असंतुलित चक्र से जुड़ा हो सकता है। ज्यादा सोने से शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से मांसपेशियों और तंत्रिकाओं में अकड़न महसूस हो सकती है, जिससे सामान्य शारीरिक गतिविधियां भी मुश्किल लग सकती हैं।
डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है
जरूरत से ज्यादा सोने का संबंध शरीर के हार्मोनल संतुलन से भी बताया गया है। विशेष रूप से इंसुलिन से जुड़े हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। अत्यधिक थकान के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होने और ज्यादा कैलोरी या जंक फूड खाने की आदत बनने से रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने का खतरा हो सकता है।
महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भी असर
ज्यादा नींद का असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भी पड़ने की बात एक कोरियाई अध्ययन में सामने आई है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन उपचार से गुजर रही महिलाओं में सात से आठ घंटे की नींद लेने वाली महिलाओं में गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक बताई गई। अध्ययन के अनुसार, छह घंटे या उससे कम सोने वाली महिलाओं में यह संभावना 46 प्रतिशत और नौ से 11 घंटे सोने वाली महिलाओं में 43 प्रतिशत थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा सोने से हार्मोन और शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है, जिसका असर प्रजनन क्षमता पर पड़ने की आशंका रहती है।



