देहरादून: उत्तराखंड को देश और दुनिया में देवभूमि आध्यात्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। चारधाम यात्रा गंगा-यमुना के उद्गम स्थल हिमालयी पर्यटन और शांत वातावरण इस राज्य की सबसे बड़ी पहचान रहे हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में उत्तराखंड बार-बार ऐसे विवादों की वजह से सुर्खियों में आ रहा है। जिनका सीधा संबंध राज्य की मूल पहचान से नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर उभर रही बहसों स्थानीय घटनाओं और बाहरी तत्वों द्वारा पैदा किए जा रहे विवादों से जुड़ा हुआ है। कभी किसी विशेष समुदाय से जुड़े मामलों को लेकर बहस छिड़ जाती है। कभी हरियाणा से आए पर्यटकों के व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। और हाल के दिनों में पंजाब से जुड़े कुछ मामलों ने भी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उत्तराखंड बार-बार विवादों का केंद्र क्यों बन रहा है।
सोशल मीडिया बना विवादों का सबसे बड़ा मंच

इसमे कोई दो राय नहीं है की पहले जिन घटनाओं का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित रहता था अब वही कुछ मिनटों में पूरे देश में वायरल हो जाती हैं सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अधूरी जानकारी भ्रामक वीडियो और भड़काऊ टिप्पणियां किसी भी घटना को बड़ा रूप दे देती हैं। कई बार घटनाओं की वास्तविकता सामने आने से पहले ही उन्हें सांप्रदायिक क्षेत्रीय या राजनीतिक रंग दे दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुंचता है और बाहरी राज्यों के लोगों के बीच यह संदेश जाता है कि राज्य में लगातार तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है जबकि अधिकांश मामलों में स्थिति सामान्य होती है उत्तराखंड मे बीते क महीनों मे कुछ इस तरह की घटनाएं हुई भी है लेकिन उनका असर बहुत अधिक राज्य पर पड़ता दिखता है।
गढ़वाल से कुमाऊं तक पर्यटन कारोबार पर असर

इन विवादों का सबसे बड़ा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है राज्य की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है होटल ट्रैवल एजेंसियां टैक्सी संचालक राफ्टिंग व्यवसायी गाइड स्थानीय दुकानदार और हजारों छोटे कारोबारी सीधे तौर पर पर्यटकों पर निर्भर है। जब सोशल मीडिया पर किसी विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो उसका असर बुकिंग पर दिखाई देने लगता है कई पर्यटक यात्रा स्थगित कर देते हैं तो कुछ अपनी बुकिंग तक रद्द करवा देते हैं खासकर परिवार के साथ यात्रा करने वाले लोग किसी भी नकारात्मक खबर को गंभीरता से लेते हैं और यात्रा से पहले कई बार स्थिति की जानकारी जुटाने लगते हैं।
लोग फोन कर पूछते हैं वहां सब ठीक तो है

चारधाम यात्रा और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े सुमित्र श्रृंकुज कहते हैं कि उत्तराखंड में लगातार सामने आ रहे विवादों का सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ रहा है। उनके अनुसार आए दिन किसी न किसी वजह से गढ़वाल और कुमाऊं के पर्यटन स्थलों का नाम विवादों में आ जाता है। इसका असर यह होता है कि कई लोग अपनी बुकिंग रद्द करने तक का फैसला कर लेते हैं। सुमित्र श्रृंकुज कहते हैं बीते दिनों उत्तराखंड में कभी हरियाणा कभी पंजाब और कभी हिंदू-मुस्लिम विवाद चर्चा का विषय बने रहे ऐसे में अगर पर्यटन प्रदेश की पहचान विवादों से जुड़ने लगेगी तो लोग यहां आने से पहले दस बार सोचेंगे। कुछ लोग जरूर आते हैं लेकिन परिवार के साथ यात्रा करने वाला पर्यटक सुरक्षा और माहौल को लेकर अधिक संवेदनशील होता है। लोग हमें फोन करके पूछते हैं कि वहां सब ठीक है या नहीं सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो जानबूझकर राज्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
व्यापारी भी चिंतित माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग
हरिद्वार प्रांतीय व्यापार मंडल इकाई के अध्यक्ष विशाल गर्ग का कहना है कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उनका मानना है कि कुछ लोग यहां आकर विवाद खड़ा करते हैं। फिर सोशल मीडिया के जरिए उसे फैलाने का काम करते हैं । जिससे राज्य की गरिमा प्रभावित होती है। विशाल गर्ग कहते हैं कि उत्तराखंड पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्रदेश है। लेकिन कुछ लोग यहां की मर्यादा को दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग केवल विवाद पैदा करने या माहौल खराब करने की मानसिकता से आते हैं। उन्हें चिन्हित किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से ऐसे तत्वों पर सख्त नजर रखने की मांग की है ताकि प्रदेश की सकारात्मक छवि बनी रहे।
चारधाम यात्रा के रिकॉर्ड के बीच चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सोशल मीडिया पर विवादों की चर्चा होती है। वहीं दूसरी तरफ चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर उत्तराखंड में आने वाले अधिकांश श्रद्धालु और पर्यटक राज्य की व्यवस्थाओं और धार्मिक महत्व पर भरोसा जता रहे हैं। हालांकि पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि नकारात्मक प्रचार का असर धीरे-धीरे पड़ता है और यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सरकार ने दिखाई सख्ती सीएम धामी ने दिया स्पष्ट संदेश

राज्य सरकार भी इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल के विवादों और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखंड सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करने वाला राज्य है लेकिन कानून व्यवस्था बिगाड़ने या माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य को लेकर जो लोग भ्रामक और तथ्यहीन बातें फैला रहे हैं। उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। और रिकॉर्ड बन रहे हैं ऐसे में राज्य में रहने वाले लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे शांति सौहार्द और मर्यादा बनाए रखें।
पहचान बचाने की चुनौती

उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी धार्मिक सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान है। लेकिन जब छोटी-छोटी घटनाएं सोशल मीडिया की वजह से बड़े विवादों में बदलने लगती हैं तो इसका असर केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता बल्कि पर्यटन व्यापार और राज्य की छवि पर भी पड़ता है। प्रशासनिक सख्ती जिम्मेदार सोशल मीडिया व्यवहार और स्थानीय समाज की जागरूकता ही ऐसे विवादों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है। क्योंकि आखिरकार उत्तराखंड की पहचान विवादों से नहीं बल्कि उसकी देवभूमि वाली छवि सांस्कृतिक विरासत और अतिथि देवो भव की परंपरा से है।




