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आम्रपाली हाऊसिंग ग्रुप ने घर खरीददारों से की 3 हजार करोड़ रुपये की हेराफेरी

नई दिल्ली : सही-सही जानकारी नहीं देने पर जेल में डालने की सुप्रीम कोर्ट की धमकी के बाद आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी ने मान लिया कि 2,996 करोड़ रुपये दूसरी कंपनी का बिजनेस बढ़ाने में लगा दिए गए। इसी वजह से हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पूरा करने के लिए जरूरी रकम का अभाव हो गया और ये प्रॉजेक्ट्स लटक गए। कंपनी ने कहा कि 2,996 करोड़ रुपये के डायवर्जन का आंकड़ा मार्च 2015 तक का ही है क्योंकि उसके बाद से बैलेंसशीट अपडेट ही नहीं की गई है। गौरतलब है कि आम्रपाली के सैकड़ों हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स हैं, जिनमें नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के वे 170 टावर शामिल हैं जिनमें 46 हजार होम बायर्स ने निवेश कर रखा है। इन प्रॉजेक्ट्स के लिए कंपनी ने विभिन्न वित्तीय संस्थानों एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिए भी 4,040 करोड़ रुपये जुटाए। 2015 तक की बैलेंस शीट और कुछ कच्चे-पक्के आंकड़ों का हवाला देते हुए आम्रपाली ग्रुप ने दावा किया कि उसने इन हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स में 10 हजार 300 करोड़ रुपये निवेश किए।

आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा ने एक विस्तृत शपथपत्र (ऐफिडेविट) के जरिए कोर्ट को सभी 46 ग्रुप कंपनियों के मौद्रिक लेनदेन की जानकारी दी और कहा कि 5,980 करोड़ रुपये मॉल्स और रेजॉर्ट्स बनाने, जमीन खरीदने, ऑफिस के संचालन में तथा बैंकों एवं होम बायर्स को पैसे वापस करने पर खर्च किए। शर्मा ने बताया कि आम्रपाली ग्रुप ने जुटाई गई रकम से 667 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए और यह रकम ठेकेदारों को देनी है। उन्होंने आम्रपाली की उन 9 कंपनियों की लिस्ट दी जहां से होमबायर्स के पैसे दूसरी कंपनियों में लगाए गए। कंपनी ने यह कहते हुए डायवर्जन को सही ठहराने की कोशिश की कि पैसे ग्रुप कंपनियों से बाहर नहीं गए, बल्कि ग्रुप के बिजनस बढ़ाने में ही लगाए गए। ऐफिडेविट में कहा गया है कि कुछ कंपनियों को ग्रुप की ओर से लोन दिया गया और करीब-करीब पूरी रकम वापस आ गई। सीएमडी ने ऐफिडेविट में कहा, आम्रपाली ग्रुप की कुछ कंपनियों से कुछ दूसरी कंपनियों में पैसे की हेराफेरी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, सीएफओ और ऑडिटर के संज्ञान में थी क्योंकि ऐसा उन सबके पेशेवर सलाह एवं सुझाव पर ही किया गया।

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