अन्तर्राष्ट्रीय

ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी: जमीनी हमला हुआ तो ‘आग में झोंक देंगे US आर्मी’, पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिका को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने जमीनी आक्रमण किया, तो अमेरिकी सेना को ‘आग के हवाले कर दिया जाएगा’। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब एक महीने से जारी संघर्ष को खत्म करने के प्रयास तेज हो रहे हैं।

वार्ता पर सवाल, पाकिस्तान में जुटे क्षेत्रीय देश

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने हालिया वार्ता को केवल दिखावा बताया। उनका आरोप है कि बातचीत के बहाने अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।

इधर पाकिस्तान में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री एक मंच पर जुटे हैं। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में शांति बहाल करना बताया जा रहा है, हालांकि इसमें अमेरिका और इजरायल को शामिल नहीं किया गया है।

हमले जारी, दोनों पक्षों में तेज जवाबी कार्रवाई

तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, वहीं ईरान भी मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाब दे रहा है।

रविवार को इजरायल ने दावा किया कि ईरान की ओर से कई हमले किए गए, जबकि तेहरान में भी कई जगह विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इससे साफ है कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और संघर्ष थमने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे।

निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा युद्ध

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह संघर्ष जल्द ही निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है। हालांकि, ईरान के नेता सार्वजनिक तौर पर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करते रहे हैं, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती, बढ़ी टकराव की आशंका

पश्चिम एशिया में अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। करीब 2,500 मरीन सैनिक क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जो पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है। इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 1,000 पैराट्रूपर्स को भी तैनात करने का आदेश दिया गया है, जो संवेदनशील ठिकानों को सुरक्षित करने में सक्षम हैं।

विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की धमकी से बढ़ी चिंता

इस बीच ईरान ने एक और चौंकाने वाली चेतावनी दी है। उसने कहा है कि अगर ईरानी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो क्षेत्र में मौजूद इजरायली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को सीधे निशाना बनाया जाएगा।

रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका से मांग की है कि वह तय समय सीमा के भीतर ईरानी शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे हमलों की निंदा करे और इजरायल को ऐसे हमले रोकने के लिए बाध्य करे।

तेल सप्लाई और हवाई यात्रा पर पड़ा असर

यह संघर्ष अब वैश्विक स्तर पर भी असर दिखाने लगा है। तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है, जिससे उर्वरक संकट गहराने की आशंका है। साथ ही हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है और कई रूट्स पर उड़ानों में बाधाएं देखी जा रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीतिक पकड़ ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को हिला दिया है। इसी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।

3,000 से ज्यादा मौतें, हमले लगातार जारी

इस संघर्ष में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के 11,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है।

तेहरान में प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाल के दिनों में भीषण हवाई हमले हुए हैं। वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में इजरायल की ओर मिसाइलें दागी हैं, जिन्हें खाड़ी देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने कई बार हवा में ही नष्ट कर दिया।


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