तिब्बत में तड़के भूकंप के झटकों से दहशत, घरों से बाहर निकले लोग; रिक्टर स्केल पर 4.1 रही तीव्रता

तिब्बत में शुक्रवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। कई इलाकों में लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 दर्ज की गई।
भूकंप शुक्रवार सुबह भारतीय समयानुसार करीब 3:10 बजे आया। एनसीएस के अनुसार इसका केंद्र 35.385 उत्तरी अक्षांश और 85.112 पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की गहराई जमीन से लगभग 38 किलोमीटर नीचे मापी गई है। कम तीव्रता होने की वजह से बड़े नुकसान की आशंका नहीं जताई गई है, लेकिन झटकों के कारण लोगों में भय का माहौल देखा गया।
तिब्बत-नेपाल क्षेत्र क्यों है भूकंप के लिहाज से संवेदनशील?
विशेषज्ञों के अनुसार तिब्बती पठार दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में गिना जाता है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर है। यही टकराव हिमालय पर्वत श्रृंखला के निर्माण का कारण भी माना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस क्षेत्र में प्लेटों की लगातार हलचल के चलते अक्सर भूकंप आते रहते हैं।
भूवैज्ञानिकों के मुताबिक तिब्बत और नेपाल मुख्य फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं, जहां भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है। इस टेक्टोनिक गतिविधि के कारण क्षेत्र में जमीन के भीतर भारी दबाव बनता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आता है। यही कारण है कि हिमालयी क्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।
उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं
विशेषज्ञ बताते हैं कि कम गहराई वाले यानी उथले भूकंप ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी भूकंपीय तरंगें जमीन की सतह तक जल्दी पहुंचती हैं। इससे धरती ज्यादा जोर से हिलती है और इमारतों को अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। हालांकि इस बार भूकंप की तीव्रता मध्यम रही, इसलिए बड़े खतरे की स्थिति नहीं बनी।
हिमालयी क्षेत्र में लगातार बनी रहती है हलचल
वैज्ञानिकों के अनुसार तिब्बती पठार में स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल फॉल्टिंग जैसी भूगर्भीय प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। यही वजह है कि यहां समय-समय पर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जाते हैं। इतिहास में इस क्षेत्र में कई बड़े भूकंप आ चुके हैं, जिनकी तीव्रता 8.0 या उससे अधिक तक दर्ज की गई थी।



