Xi Jinping Vs Trump: ‘अमेरिका पतन की ओर बढ़ रहा’, शी जिनपिंग के बयान पर ट्रंप का पलटवार, बोले- ये बाइडन राज की नाकामी

वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। शी जिनपिंग द्वारा अमेरिका को “पतन की ओर बढ़ता राष्ट्र” बताए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि ट्रंप ने सीधे चीन पर हमला करने के बजाय इस बयान को पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल से जोड़ दिया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि शी जिनपिंग का इशारा मौजूदा अमेरिका की ओर नहीं बल्कि बाइडन प्रशासन के चार साल के शासनकाल की ओर था। उन्होंने लिखा कि “जब राष्ट्रपति शी ने अमेरिका को संभवतः एक ‘पतनशील राष्ट्र’ कहा, तो वह उस भारी नुकसान की बात कर रहे थे जो देश ने ‘स्लीपी जो बाइडन’ और उनके प्रशासन के दौरान झेला। इस मामले में वह 100 प्रतिशत सही थे।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब बीजिंग में अमेरिका और चीन के बीच शिखर वार्ता जारी है। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक प्रभुत्व को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ऐसे में शी जिनपिंग की टिप्पणी को चीन की ओर से अमेरिका पर बड़ा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
ट्रंप ने फिर साधा बाइडन पर निशाना
डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने राजनीतिक भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट में जो बाइडन प्रशासन को अमेरिका की आर्थिक और वैश्विक कमजोरियों के लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने चीन के बयान को अपने राजनीतिक विरोधी के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप आगामी राजनीतिक रणनीति के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक नेतृत्व जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वहीं चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा अमेरिकी राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।
अमेरिका-चीन संबंधों पर दुनिया की नजर
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती बयानबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है। व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिबंध, ताइवान मुद्दा और इंडो-पैसिफिक रणनीति को लेकर दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ऐसे में शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान वैश्विक कूटनीति में नए संकेत माने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।



