उत्तर प्रदेशराज्य

कानपुर की बंद मिलों की जमीनों पर खुल सकता है विकास का रास्ता, पुराने विवाद सुलझाएगा स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन

कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर की बंद पड़ी कपड़ा मिलों और नजूल जमीनों से जुड़े वर्षों पुराने विवादों के समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने इन जटिल मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी अब स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (एसटीसी) को सौंप दी है। माना जा रहा है कि इस पहल के बाद बंद मिलों की करोड़ों की जमीनों के उपयोग का रास्ता साफ हो सकेगा।

कानपुर में ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) और नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन (एनटीसी) की कई मिलें वर्षों से बंद पड़ी हैं। इनके साथ जुड़े कानूनी विवादों और नजूल जमीनों की वजह से करीब 309 एकड़ भूमि का उपयोग अब तक नहीं हो पा रहा था।

नीति आयोग की तर्ज पर काम कर रहा एसटीसी

स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन प्रदेश की नीतियों और संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए गए हैं। एसटीसी के सक्रिय होने के बाद नजूल संपत्तियों के विवादों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज हुई है।

जिला प्रशासन ने बीआईसी और एनटीसी की 58 नजूल संपत्तियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। इसमें री-एंट्री, लीज समाप्ति और हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति का अध्ययन किया गया है।

कानूनी विवाद और कब्जों में फंसी हैं जमीनें

जांच में सामने आया कि अधिकांश संपत्तियां कानूनी विवादों, लिक्विडेशन प्रक्रिया और कब्जों के कारण अटकी हुई हैं। प्रशासन अब तक 18 संपत्तियों पर री-एंट्री की कार्रवाई पूरी कर चुका है, जबकि करीब 40 संपत्तियों में कंपनियों के लिक्विडेटर नियुक्त होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

सबसे बड़ा विवाद म्योर मिल की जमीन को लेकर सामने आया है। प्रशासन द्वारा री-एंट्री की कार्रवाई के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंच गया, जहां से स्थगन आदेश मिलने के कारण पूरी प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है।

हजारों करोड़ की जमीन पर विकास योजनाओं की तैयारी

बीआईसी की प्रमुख मिलों में लाल इमली, एल्गिन मिल एक, एल्गिन मिल दो, कानपुर टेक्सटाइल्स और ब्रस वेयर शामिल हैं। इसके अलावा एल्गिन गेस्ट हाउस, कैनिलवर्थ, पुलिस कमिश्नर आवास, आशियाना, एवरस्ले और डेल जैसे पुराने बंगले भी इस दायरे में आते हैं। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 70 एकड़ बताया गया है, जिनकी लीज अवधि वर्षों पहले समाप्त हो चुकी है।

वहीं एनटीसी की म्योर मिल, न्यू विक्टोरिया मिल, स्वदेशी कॉटन मिल, लक्ष्मीरतन कॉटन मिल और अथर्टन मिल की जमीन मिलाकर लगभग 239.68 एकड़ भूमि शामिल है। इनमें म्योर मिल और न्यू विक्टोरिया मिल नजूल संपत्तियां हैं।

इन जमीनों की मौजूदा बाजार कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी जा रही है। सरकार की योजना यहां नए निवेश, आवासीय परियोजनाएं, व्यावसायिक केंद्र और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की है। इससे कानपुर के औद्योगिक ढांचे में बड़ा बदलाव आने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

एसटीसी को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट

एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि सभी विवादित नजूल संपत्तियों का रिकॉर्ड संकलित कर लिया गया है। जिन मामलों में कानूनी बाधाएं हैं, वहां विधिक राय लेने के बाद एसटीसी को रिपोर्ट भेजी गई है। अब इन मामलों के निस्तारण के लिए आगे की कार्रवाई कमीशन के स्तर पर की जाएगी।

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